जमीन विवाद रेवेन्यू नहीं सिविल कोर्ट भेजे जाएंगे

On Date : 14 January, 2018, 1:05 PM
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प्रशासनिक संवाददाता, भोपाल
प्रदेश में जमीनों के मालिकाना हक को लेकर सरकार और निजी व्यक्तियों के बीच विवाद से अब राज्य सरकार पल्ला झाड़ने की तैयारी में है। राज्य सरकार इसके लिए राज्य भूराजस्व संहिता में संशोधन करने की तैयारी में है। राज्य भूमि सुधार आयोग इसकी कवायद में जुट गया है।
अभी तक सरकारी जमीनों के निजी व्यक्तियों के नाम हो जाने के बाद होने वाले राज्य स्तर के विवाद की सुनवाई राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव स्तर पर होती है। राजस्व विभाग में इन्हीं विवादों की भरमार है। लंबित राजस्व मामलों की संख्या भी इन्हीं मामलों को लेकर ज्यादा है। इसमें कमी लाने के लिए भूराजस्व संहिता की कई धाराओं में बदलाव किया जाएगा। इस संशोधन के बाद ऐसे मामलों की सुनवाई राज्य शासन स्तर पर नहीं होगी बल्कि इनके लिए लोगों को सिविल कोर्ट में वाद दायर करना होगा। राज्य सरकार का मानना है कि यदि राज्य के पास से ऐसे विवादास्पद मामलों की सुनवाई हटती है तो राजस्व अमले का लोड काफी हद तक कम हो जाएगा। वहीं सिविल कोर्ट में वाद दायर करने और लंबे समय तक चलने वाली सुनवाई और उसके भारी-भरकम खर्च से बचने के लिए लोग कम वाद लगाएंगे। कोर्ट के बाहर ही काफी हद तक समझौते हो सकेंगे।
खजाने पर बढ़ेगा बोझ
राज्य सरकार ऐसा करने की सोच जरुर रही है लेकिन इससे राजस्व विभाग का लोड तो कम होगा लेकिन कानूनी प्रक्रिया में सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ जाएगा। जब ये मामले सिविल कोर्ट में जाएंगे तो जिन निजी जमीनों पर सरकार को अपना दावा साबित करना होगा उसके लिए उन्हें वकीलों की फौज खड़ी करना होगा। इसके लिए सरकारी खजाने से हर साल भारी-भरकम राशि वकीलों की फीस के रुप में जाएंगी। सिविल कोर्ट में प्रकरण दस से बीस साल तक चलते है इसके कारण बार-बार इनमें ओएसडी बदलने होंगे। वकील भी लगातार रखने होंगे।

4 IFS केंद्र के 360 डिग्री फार्मूले पर फिट
प्रसं, भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा केंद्र में प्रतिनियुक्ति के लिए शुरू किए गए 360 डिग्री फार्मूले के तहत प्रदेश के चार आईएफएस केन्द्र में संयुक्त सचिव पद के लिए इम्पेनलमेंट हुए हैं। इनमें दो अफसर पहले भी केन्द्र में पदस्थ रह चुके हैं। भारत सरकार में संयुक्त सचिव के समतुल्य पदों पर रखने के लिए चार दर्जन से अधिक अधिकारियों के पैनल को मंजूरी दी है। इनमें प्रदेश से चार आईएफएस 1989 बैच के महेन्द्र सिंह धाकड़, 91 बैच के शुभरंजन सेन, 94 के अनिल कुमार खरे और 95 बैच के बी एस अन्नीगिरी हैं। भारत सरकार में जाने के लिए मत्स्य पालन महासंघ के प्रबंध संचालक महेन्द्र सिंह धाकड़ ने दो साल पहले अपना आवेदन भेजा था। धाकड़ पहले भी प्रतिनियुक्ति पर यूएनडीपी में रह चुके हैं।

43 SAS सीखेंगे गुड गवर्नेंस के गुर
प्रसं, भोपाल। राज्य प्रशासनिक सेवा के 43 अधिकरी इसी माह दो अलग-अलग स्थानों पर  गुड गवर्नेंस के गुर सीखेंगे। पहला प्रशिक्षण आपदा प्रबंध संस्थान भोपाल में 15 से 18 जनवरी के बीच होगा। वहीं दूसरा प्रशिक्षण गुजरात की  सीईपीटी यूनिवर्सिटी अहमदाबाद में 29 से 31 जनवरी के बीच होगा।  प्रदेश के विभिन्न जिलों में मैदानी अंचलों में आने वाली आपदाओं से जूझने के लिए राज्य सरकार हर जिले में अधिकारियों को प्रशिक्षण दे रही है। ये अधिकारी उस जिले में लगने वाले मेले, कुंभ, धार्मिक स्थलों पर जुटने वाली भीड़ में सुरक्षा प्रबंधन, बाढ़, सूखे के दौरान उत्पन्न स्थितियों से निपटने के गुर और अग्निदुर्घटनाओं तथा लायन आर्डर के दौरान उत्पातियों से निपटने के गुर सीखेंगे। जो अधिकारी ये प्रशिक्षण ले रहे है उनमें खेमचंद बोपचे, आदित्य कुमार रिछारिया, राजेश शाही, वीरप्रताप सिंह, शिवप्रसाद मडराह, चिरोंजीलाल चनाप, दिव्या अवस्थी व अन्य शामिल हैं।

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