'हमारा दिमाग विज्ञानोन्मुख होना चाहिए'

On Date : 14 January, 2018, 4:28 PM
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ग्वालियर: दुनिया में अगर कोई चीज सच्चाई के सबसे करीब है तो वो है विज्ञान बाकि सब एक विश्वास या आस्था है, जो हम बिना परीक्षण सिर्फ मानते हैं कि वो सच है। सही मायने में सच से डिगे नहीं, यह विज्ञान का मूल-मंत्र है। साइंटिस्ट आॅब्जर्वेशन, डाटा करेक्शन, थ्योरी आदि के जरिए कोई किसी चीज को इन्वेन्ट या प्रूव करता है। फिर कई साइंटिस्ट या लोग उसे डिस्प्रूव करते हैं, फिर प्रयोग होते हैं और अंतत: एक निष्कर्ष पह सहमति होकर थ्योरी आती है। ऐसे में किसी भी स्टूडेंट, टीचर या रिसर्चर को विज्ञान पर वर्क करने के लिए सही माहौल की जरूरत होती है। इसमें सबसे जरूरी है स्वयं के दिमाग का साइंटिफिक टेम्परामेंट होना। हमारा दिमाग विज्ञानोन्मुख होना चाहिए, जो विश्वास न करे सिर्फ सच खोजे व माने।’
साइंस स्टूडेंट्स को सम्बोधित करते हुए यह विचार रखे आईटीएम यूनिवर्सिटी के चांसलर रमाशंकर सिंह ने। वे विंटर साइंस कैम्प इंस्पायर-2018 के आखिरी दिन मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भारत में विज्ञान के विकास के लिए सही माहौल बनाने पर जोर देते हुए कहा कि देश में शांति, लिंग व जातिगत भेदभाव, गरीबी व पर्यावरण पर ध्यान देना जरूरी है। जब इन समस्याओं का समाधान हो जाएगा, तो विज्ञान में जबरदस्त परिवर्तन व विकास दिखेगा।
हम इतिहास को बदल नहीं सकते लेकिन उससे सीख लेकर बेहतर आज और कल बना सकते हैं। सच और अनुभव हर व्यक्ति के अलग-अलग होते हैं, एक-दूसरे के सच और अनुभव की इज्जत करना भी हमें आना चाहिए। इस मौके पर स्टूडेंट्स ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी और इंस्पायर के प्रति अपने विचार भी व्यक्त किए।
कार्यक्रम के अंत में दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रो. डॉ मोनिका कौल, आईटीएम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ केके द्विवेदी, एडवाइजर आॅफ चांसलर डॉ आरडी गुप्ता ने विभिन्न कॉम्पटीषन में विजयी स्टूडेंट्स को पुरस्कार भी वितरित किए । इस मौके पर मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ दौलत सिंह चैहान, रजिस्ट्रार ओमवीर सिंह, इंस्पायर कॉर्डिनेटर डॉ अर्चना कंसल व को-कॉर्डिनेटर डॉ वाय सी गोस्वामी, डीन एसओईटी डॉ रंजीत सिंह तोमर, उदय गहलोत, रेखा वषिष्ठ, तृप्ति पाठक, राजेष षर्मा सहित अन्य उपस्थित थे।
इतिहास में भी मौजूद था विज्ञान
पुराने जमाने में होने वाले यज्ञ की हवन सामग्री प्रदूषण से बचाती थी, वृक्षों की पूजा होती थी, उन्हें काटा नहीं जाता था, इससे पर्यावरण संतुलित रहता था, बीमार होने पर तमाम औषधियां न सिर्फ बीमारी ठीक करती थीं बल्कि प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती थीं। इन सबसे यह बात तो सिद्ध होती है कि उस जमाने में किए जाने वाले क्रियाकलाप पर्यावरण संतुलन बनाए रखते थे। पूर्व में पर्यावरण को सहेजने और विज्ञान समझाने के लिए यह सब दिखाया स्किट के माध्यम से केवी स्टूडेंट्स ने। इंस्पायर-2018 के अंतिम दिन साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर आधारित स्किट में स्टूडेंट्स ने एक-से बढ़कर एक मंचन किए। उन्ळोंने टेक्नोलॉजी इन क्लासरूम, विज्ञान ही ज्ञान है, इतिहास में विज्ञान विषयों पर स्किट प्रस्तुत किए।
अब इमेजनरी जॉब में है फ्यूचर: डॉ गोस्वामी
टेक्नोलॉजी हमेषा जॉब पैटर्न बदलती है। ऐसा 18वीं सदीं से होता आ रहा है। वर्तमान में टेक्नोलॉली के क्षेत्र में बूम देखते हुए अब ये तय है कि भविष्य पूरी तरह से मषीनरी पर डिपेंड होगा। हर सेक्टर अब धीरे-धीरे  मानवरहित हो रहा है।  रोबोट और मषीन के युग में अब युवाओं के लिए जॉब सबसे बड़ा चैलेंज है। युवाओं को इससे घबराने की बजाय स्वयं की स्किल्स डवलप करने और हर क्षेत्र में काम करने के टैलेंट को बढ़ाना होगा। ट्रेंड्स फॉर फ्यूचर जॉब्स के बारे में यह जानकारी दे रहे थे आईटीएम यूनिवर्सिटी के फिजिक्स डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ योगेष गोस्वामी। उन्होंने बताया कि इस मषीनरी व रोबोट युग में भी मानवों की जरूरत मार्केटिंग, प्रोडक्षन, क्रिएटिविटी, डिलीवरी, फीड, फिक्स आदि के लिए हमेषा रहेगी। खासकर टेक्नोलॉजी के सहारे नई -नई चीजे इमेजिनेषन द्वारा ईजाद करना सबसे बड़ी जरूरत रहेगी। इसलिए युवा खुद को ज्यादा से ज्यादा अपडेटषन और स्किल्स के साथ इमेजनरी जॉब के बारे में सोेचे। मिनिस्ट्री आॅफर हयूमन रिसोर्स एंड डवलपमेंट तो ऐसे आइडिया पर वर्क करने वाले युवाओं के लिए 100 करोड़ रूपए तक की फंडिंग कर रखी है। इनमें हर क्षेत्र पर किसी आइडिया पर वर्क करने के लिए उन्होंने कुछ संस्थान तय कर रखे हैं, जिसमें नियत राषि दे रखी है ताकि नए आइडिया ईजाद हो सके।
ग्लोबल डिसबेलेंस खतरे की घंटी: डॉ. मोनिका कौल
हमारे स्वयं की गल्तियों के कारण हमने ग्लोबल वेदर अंसतुलित कर दिया है। जिस कारण ग्लोबल टेम्परेचर अब स्थिर नहीं रहा है। कहीं बारिष नहीं गिर रही तो सूखा पड़ा है, कहीं अत्यधिक सर्दी- ठंडी हवाएं है तो कहीं गर्मी में पारा हद से ज्यादा बढ़ जाता है। ये सारे प्राकृतिक असंतुलन हमारे लिए खतरे की घंटी है क्योंकि जीवन के लिए जरूरी माने जाने वाले एंज्याम्स पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। यह कहना था दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रो.डॉ मोनिका कौल का, वे इंस्पायर-2018 के अंतर्गत ग्लोबल एनवायरमेंट व प्लांट इवोल्यूषन विषय पर व्याख्यान दे रही थीं।
प्राणियों में ष्वसन, पौधों में फोटोसिंथेसिस आदि प्रक्रियाओं पर इससे प्रभावित हो रही हैं। एंजायम्स विकसित होने के लिए नियत पीएच और वातावरण होना चाहिए। लेकिन ग्लोबल वेदर में कुछ भी अब संतुलित नहीं रहा है। इस कारण ये बायोलॉजिकल रिसोर्सेस पर बहुत बुरा प्रभाव छोड़ रहे हैं। ऐसे में साइंस स्टूडेंट्स को भविष्य में अपना फोकस ग्लोबल बैलेंस कैसे रखा जाए, इसमें करना होगा। मानव जीवन और किसी भी सामाजिक समस्याओं को दूर करने के लिए बायोलॉजिकल नॉलेज बहुत जरूरी है। चाहे वो जटिल बीमारियों से लड़ने वाली दवाईयां हो या फिर फसल उगने के लिए उपजाउं जमीन की जानकारी।
ये रहे रिजल्ट
क्विज
प्रथम टीम- रूद्रांष गुप्ता, सेंटर मेरी इंटर कॉलेज इटावा, नरेष सिंह रावत व सचिन बघेल जवाहर नवोदय विद्यालय ग्वालियर।
द्वितीय टीम- काव्या गुप्ता सेंट मेरी इंटर कॉलेज इटावा, अगम जैन केवी बीना, रितिक श्रीवास्तव जवाहर नवोदय विद्यालय, ग्वालियर
तृतीय टीम- अन्वेषा कुषवाह सेंट मेरी इंटर कॉलेज इटावा, नमन तिवारी भारतीय विद्यालय भवन प्रिज्म स्कूल सतना, सचिन कुमार सेंट मेरी इंटर कॉलेज इटावा
वाद-विवाद- इम्पेक्ट आॅफ सोषल मीडिया आॅन  सोसायटी
प्रथम- अन्वेषा कुषवाह सेंट मेरी इंटर कॉलेज इटावा
द्वितीय- इतिका त्रिवेदी, इषिका त्रिवेदी सेंटर मेरी इंटर कॉलेज इटावा
तृतीय- नमन तिवारी, भारतीय विद्या भवन प्रिज्म स्कूल सतना
पोस्टर- स्वच्छ भारत मिषन
प्रथम- श्रुति पांडे व प्रगति मिश्रा भारतीय विद्या भवन्स प्रिज्म स्कूल सतना
द्वितीय- प्रियंका आर्य व ज्योति कुषवाह, नवनीत सक्सेना कोचिंग सेंटर
तृतीय- प्रांकुल पाराषर, विवके रिछारिया व सनुज उपाध्याय, केवी छतरपुर
स्क्टि- साइंस एंड टेक्नोलॉजी
प्रथम- श्री सरस्वती सेमिनारे सीनियर सेकंडरी स्कूल, मंदसौर
द्वितीय- सेंट मेरी स्कूल मुरैना
तृतीय- केवी बीना
 
(अनिल माथुर)
उप-कुलसचिव(जनसम्पर्क)
आई.टी.एम.यूनिवर्सिटी,ग्वालियर
मोबा.: 9425307448

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