बैकफुट पर भाजपा नेता रसूखदारों के घर आज टारगेट पर

On Date : 14 January, 2018, 4:39 PM
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प्रदेश टुडे संवाददाता, ग्वालियर
मुरार छह नंबर चौराहे से जड़ेरूआ तक सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों में भाजपा नेताओं से करीबी रखने वाले रसूखदार भी शामिल है। इन रसूखदारों ने अपनी इसी पंहुच का फायदा उठाया और प्रशासनिक अफसरों को फोन लगवाकर उनके मंसूबों को ठंडा कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर सरकारी जमीन पर खड़े करीब 183 में से 115 आशियाने तो तोड़े गए, लेकिन ये सभी उन गरीबों के थे जो रात भर अपने टूटे मकानों के आगे बैठकर रोते बिलखते रहे। जबकि इसी सरकारी जमीन पर बने रसूखदारों के ऊंचे आशियानों की एक र्इंट भी एसडीएम एचबी शर्मा नहीं हटा पाए।
भेदभाव पूर्ण कार्यवाही के आरोप में घिरे प्रशासन की जमकर किरकिरी हुई। खबर है कि इस बात की जानकारी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को भी दी गई है। इसलिए कल तक फोन करके इन रसूखदारों के घरों को तोड़ने से बचाने वाले भाजपा नेता अब खुद को बेदाग साबित करने के लिए बैकफुट पर आ गए है। बताया जाता है कि बाकी के बचे करीब 60 मकानों को तोड़ने के लिए आज फिर से प्रशासन ने पुलिस और नगर निगम अमले को जड़ेरूआ में कॉल किया है। प्रशासन के टारगेट पर सबसे पहले वहीं ऊंची पंहुच रखने वाले रसूखदारों के घर होंगे, जिन्हें कल छोड़ दिया गया था।
एक्सपर्ट भी रहेंगे आज साथ: कई मकानों पर लाल निशान थे, लेकिन उन्हे तोड़ा नहीं जा सका। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक अगर उन्हे तोड़ा जाता तो पूरा मकान गिर सकता था। इसलिए ऐसे मकानों को तोड़ने के लिए आज एक्सपर्ट भी साथ में रहेंगे।
टूटे घरों के सामने रात भर रोते रहे लोग
उच्च न्यायालय के आदेश का पालन कराने के लिए जड़ेरूआ तक सरकारी जमीन पर बने मकानों को तोड़ दिया गया। ये वो मकान थे जहां लोग कई सालों से रह रहे थे। मजदूर गजराज सिंह, रामवरन, रामश्री जैसे कई लोगों के घर कल एक ही झटके में धराशाही कर दिए गए। अपने टूटे मकानों के सामने लोग अपने परिवार के साथ रात भर वहीं बैठकर रोते बिलखते रहे। हर कोई यही कह रहा था, कि अब कहां जाए।  कौन देगा आसरा। पूरे परिवार को आखिर कहां ले जाए? अपने परिवार के साथ रहने वाले लक्ष्मण ने रोते हुए बताया कि घर की छत छिन जाना मौत के बराबर लग रहा है।

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