चक्रवात: केरल के 600 से ज्यादा मछुआरे लापता ...

On Date : 15 December, 2017, 8:43 AM
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केरल: चक्रवात ओखी के देश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में तबाही मचाने के बाद से तमिलनाडु और केरल के 600 से ज्यादा मछुआरे लापता हैं. अधिकारी ने बताया कि तमिलनाडु के 433 मछुआरे और केरल के 186 मछुआरों का अब तक पता नहीं चल सका है. अधिकारी ने बताया कि दो दिसंबर को चक्रवात आने के बाद से लापता हुए लोगों की अंतिम संख्या दोनों राज्य सरकारों को अभी देनी है. उन्होंने कहा कि घर घर जाकर सत्यापित करने की प्रक्रिया चल रही है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद लापता लोगों की अंतिम संख्या का पता लगेगा. अधिकारियों ने बताया कि तटीय क्षेत्र में ओखी के आने से पहले कई मछुआरे नौकाओं और छोटी नौकाओं से समुद्र में गए थे. चिंता उन लोगों को लेकर है जो ऐसी छोटी नौकाओं से गए थे.

अबतक चक्रवात ओखी की वजह से केरल में 68 और तमिलनाडु में 14 लोगों की मौत हुई है. चक्रवात ओखी एक बंगाली शब्द है जिसक मतलब ‘आंख’ होता है. यह दो दिसंबर को लक्षद्वीप पहुंचा था और इसने द्वीप के साथ केरल तथा तमिलनाडु के तटीय इलाकों में घरों, बिजली की लाइनों और अन्य आधारभूत ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया था. यह छह दिसंबर को गुजरात के दक्षिणी तट पर पहुंचने से पहले ही कमजोर पड़ गया था.

पिछले महीने केरल के तटीय इलाकों में तबाही मचाने वाले ओखी चक्रवात के कारण मरने वालों की संख्या बढ़ कर गुरुवार (14 दिसंबर) को 68 हो गई. मछुआरों के लिए राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी करने वाले राज्य नियंत्रण कक्ष ने कहा कि कोझीकोड जिला में दो और शव बरामद किए गए हैं. अधिकारियों के मुताबिक 95 मछुआरे अब भी लापता हैं.

कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी ने चक्रवात ओखी से प्रभावित मछुआरों से गुरुवार (14 दिसंबर) को मुलाकात की और कहा कि उनकी पार्टी मछुआरों के लिए अलग मंत्रालय बनाने के मुद्दे को संसद में ‘जोरशोर’ से उठाएगी. केरल में तिरुवनंतपुरम के नजदीक पुन्थुरा और विझिंजम तथा तमिलनाडु में कन्याकुमारी की यात्रा के दौरान उन्होंने यह बात कही. ये इलाके चक्रवात से काफी प्रभावित रहे. चक्रवात में मारे गए मछुआरों के परिवारों से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकारों को प्राकृतिक आपदा से सीख लेने की आवश्यकता है, जिसके कारण 95 मछुआरे लापता भी हो गए हैं.

उन्होंने तिरुवनंतपुरम के निकट पून्थुरा में प्रभावित परिवारों से बात करते हुए कहा, ‘जब कोई त्रासदी होती है, तो हर किसी को उससे सीख लेनी चाहिए और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए. हमारे पास समुद्र में जाने वाले मछुआरों के लिए बेहतर चेतावनी प्रणाली होनी चाहिए.’ कांग्रेस नेता ने कहा कि मछुआरों की स्थिति किसानों से मिलती जुलती है. उन्होंने कहा, ‘वे दोनों मुश्किलों का सामना कर रहे हैं.’

केरल से लगते कन्याकुमारी में उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि मछुआरों के लिए इस कठिन समय में कोई संस्थान, कोई मंत्रालय होना चाहिए जो आपके हितों को देखे ताकि आप जान सकें कि कठिन समय में किसके पास जाना है... हम मुद्दे को जोरदार तरीके से संसद में उठाएंगे.’ स्थानीय लातिन कैथोलिक चर्च की मांग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि केंद्र में मछुआरों के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया जाए.

राहुल ने कहा, ‘किसानों के पास एक मंत्रालय है जो उनके हितों को देखता है और मेरा मानना है कि अब समय आ गया है कि हम मछुआरों के लिए भी एक मंत्रालय का गठन करें जो उनके हितों को देखे और उन हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करे.’ गुजरात में चुनाव प्रचार के व्यस्त कार्यक्रम के बाद यहां आने वाले गांधी ने कहा कि वह किसानों से मिलने पहले ही आना चाहते थे, लेकिन गुजरात चुनाव से जुड़े पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण वह ऐसा नहीं कर सके और उन्होंने इसके लिए माफी मांगी.

उन्होंने कहा, ‘आपमें से कुछ ने अपने बेटे खोए हैं, कुछ ने अपने पति खोए हैं. आपके जीवन में उनकी जगह कोई नहीं ले सकता... हम आपके जीवन को अधिक से अधिक आसान बनाने की कोशिश करेंगे.’ इससे पहले राहुल ने चक्रवात के कारण मारे गए लोगों की तस्वीरों पर पुष्पांजलि अर्पित की. उन्होंने उनके परिजन को सांत्वना दी. इसके बाद उन्होंने निकटवर्ती विजहिंजम का दौरा किया. उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि प्रमुख विपक्ष के तौर पर कांग्रेस हर किसी को उचित मुआवजा दिलाने के लिए सरकार पर दबाव बनाएगी.

राहुल से बातचीत के दौरान कुछ महिलाएं रो पड़ीं. गांधी ने मछुआरा समुदाय को सांत्वना देते हुए कहा, ‘आपने जो गंवाया है, उसकी कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती और न ही मेरे शब्दों से आपके नुकसान की भरपाई हो सकती है.’ इस दौरान राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथला, पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी और कांग्रेस सांसद शशि थरूर और के सी वेणुगोपाल, राहुल गांधी के साथ थे.

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