हड़ताल के नाम पर गुंडागर्दी: सवारी बैठाने वाले आॅटो चालकों को पीटा

On Date : 12 January, 2018, 9:24 PM
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हड़ताल सफल बनाने के लिए महासंघ ने किया बल प्रयोग
इंदौर। आॅटो रिक्शा चालकों की हड़ताल आंशिक रूप से सफल रही। शहर में सारे आॅटो बंद करने का महासंघ का दावा फेल हो गया। जो आॅटो चालक हड़ताल में शामिल न होकर सवारी बैठा रहे थे, उन्हें महासंघ से जुड़े ड्राइवरों ने पीटा। स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले आॅटो और वैन पर प्रतिबंध के बाद रिक्शा चालक महासंघ ने हड़ताल की घोषणा की थी।
महासंघ ने दावा किया था कि शहर के सभी आॅटो चालक उसके साथ हैं। कोई भी आॅटो नहीं चलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दोपहर में गांधी हॉल परिसर में इकट्ठा हुए महासंघ से जुड़े रिक्शा चालकों ने नारेबाजी कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। इस दौरान शास्त्री ब्रिज पर सवारी ले जाते दो रिक्शा चालकों से मारपीट की गई। इससे सवारियां घबरा गई। दोपहर में मालवा मिल चौराहे पर भी महिलाओं को ले जा रहे एक आॅटो को रोका गया। उसके चालक के साथ मारपीट की गई। यह देख महिला वहीं रोने लगी।
गाड़ियों में तोड़फोड़ की
महासंघ के लोगों को पता था कि शहर के सभी रिक्शा चालक उनके साथ नहीं हैं, इसलिए उन्होंने हड़ताल सफल बनाने के लिए बल प्रयोग का निर्णय लिया। अलग-अलग दस्ते बना दिए। रेलवे स्टेशन, मालवा मिल, रेडिसन चौराहे पर दस्तों ने गाड़ियों में तोड़फोड़ की। टायर पंक्चर करने के लिए नुकीले औजार भी दिए गए थे।
ये रिक्शा चालक नहीं, गुंडे हैं
मालवा मिल पर जब रिक्शा चालक मारपीट कर रहे थे। तब वहां खड़े लोगों ने बीच बचाव करने का प्रयास भी किया। उन्होंने कहा कि ये लोग गुंडे हैं जो अपने ही साथियों के साथ मारपीट कर रहे हैं। स्कूली बच्चों को नहीं ले जाने के मामले में हड़ताल की जा रही है, तो दूसरे यात्रियों को परेशानी में क्यों डाला जा रहा है।

स्कूली वैन, आॅटो, मैजिक को बंद करना प्रशासन का तुगलकी निर्णय: यादव
इंदौर। डीपीएस स्कूल बस हादसे के बाद स्कूली वैन, आॅटो और मैजिक को बंद करने के प्रशासन के इस आदेश को कांग्रेस ने तुगलकी फरमान बताया है। प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव ने कहा कि हादसे के बाद शिवराज सरकार जागी और फिर जांच की, यदि यह सब पहले कर लिया जाता तो बच्चों को मौत के मुंह में जाने से रोका जा सकता था। यादव ने कहा कि इस जांच के नाम पर प्रशासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के नाम पर कई अव्यवहारिक निर्णय लिए जा रहे हैं। एक ऐसा ही निर्णय स्कूली वाहनों को बंद करना है। बगैर कोई वैकल्पिक इंतजाम किए प्रशासन ने सैकड़ों स्कूली वैन, आॅटो रिक्शा और मैजिक को बंद करने का निर्णय ले लिया। यह हजारों पालकों के साथ घोर अन्याय है। इस निर्णय से हजारों पालक परेशान हो रहे हैं। कई स्कूलों में आज भी बस सुविधा नहीं हैं। ऐसे में पालक इन्हीें वैन व आॅटो के भरोसे हैं। कई स्कूल ऐसे हैं, जहां की संकरी गलियों में ये छोटे वाहन ही जा सकते हैं। ऐसे में परीक्षा के दौर में, बगैर तैयारियों के अचानक लिया गया उक्त निर्णय, स्कूली बच्चों व पालकों के लिए परेशानी भरा सबब है। यादव ने कहा कि प्रशासन के इस निर्णय से हजारों वाहन चालकों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उनके रोजगार की व्यवस्था भी प्रशासन को करना चाहिए। प्रशासन शीघ्र ही पालकों के हक में कोई राहतभरा फैसला लें अन्यथा कांग्रेस कार्यकर्ता पालकों के साथ सड़कों पर प्रशासन के विरुद्ध उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

इंदौर के स्कूली बच्चो को चाहिए राहत, कांग्रेस विधायक ने दी आमरण अनशन की चेतावनी
इंदौर। इंदौर में इन दिनों वेन चालको और आॅटो चालकों के साथ ही उन पालको की फजीहत हो चली है जो अपने होनहारों का भविष्य तो स्कूल की सहायता से बनाना चाहते है लेकिन डीपीएस हादसे के बाद प्रशासन के द्वारा उठाये गए कदम अब लोगो को रास नही आ रहे है। जिसके चलते शुक्रवार को पालक और चालक एक साथ अपनी परेशानी लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद पहले तो मुख्य द्वार पर प्रशासन से कुछ समय की रियायत देने की गुहार लगाई गई जिसके इंदौर के एकमात्र कांग्रेसी विधायक जीतू पटवारी भी पालको के समर्थन में उतर आए।


बढ़ती भीड़ और भारी हंगामे के बाद आखिरकार प्रशासन ने पालको और जनप्रतिनिधियों को को मुलाकात के लिये बुलाया और पालको ने एडीएम कैलाश  वानखेडे से मुलाकात की और पालको सहित कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने बताया जो पालक नौकरी पेशा उन्हें बच्चो को स्कूल लाने व ले जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है साथ ही पालको ने ज्ञापन के माध्यम से अपील की है स्थायी व्यवस्था की जानी चाहिए जो नियमो के अनुरूप हो लेकिन कुछ माह बाद बच्चो की परीक्षाएं है ऐसे में कोई रियायती रास्ता निकाला जाना चाहिए ताकि उनकी परेशानी दूर हो सके वही विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि शहरभर में ऐसे 2 लाख से अधिक पालक है जो बच्चो की पढ़ाई के खुद की नौकरी के बचाव के लिए संघर्ष कर रहे है ऐसे में कोई वैकल्पिक सुदृढ़ व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिए। इस बात पर एडीएम ने सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का हवाला देकर आश्वस्त किया कि पालको की मांगो को जिला कलेक्टर तक पहुंचाया जाएगा। इधर अंतत: बातचीत बेनतीजा होते देख आखिर में विधायक जीतू पटवारी ने प्रशासन को सीधी चेतावनी देकर कहा कि यदि 24 घन्टे में पालको की समस्या का हल नही होता है तो वे शनिवार सुबह 11 बजे से कलेक्टर कार्यालय पर आमरण अनशन पर बैठ जायेगे और उनका अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक कि पालको की समस्या का कोई स्थायी हल नही निकलेगा। कांग्रेस विधायक के इस एलान के बाद एक बार राजनीति गरमा गई है।

टवेरा की क्षमता 9 सवारी की, बैठा रखे थे 21 स्कूली बच्चे
इंदौर। परिवहन विभाग के उड़नदस्ते ने मांगलिया क्षेत्र में स्कूली बच्चों को ले जा रही टवेरा कार पकड़ी है। 9 लोगों की क्षमता वाली इस कार में 21 बच्चे सवार थे। अधिकारियों ने बताया कि सुबह मांगलिया में चेकिंग कर रहे उड़नदस्ते को एक कार एमपी 41 बीसी 0162 को रोका। ड्राइवर ने बताया कि गाड़ी टैगोर विद्यालय मांगलिया के बच्चों को ले जाती है। परिवहन उपायुक्त संजय सोनी ने बताया कि ड्राइवर बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहा था। कार को राजसात करने के लिए मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा गया है। स्कूली आॅटो और वैन पर प्रतिबंध लगने के बाद स्कूलों के बाहर जाम लगने का सिलसिला जारी है।

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