चारा घोटाला : तेजस्वी यादव, रघुवंश, तिवारी... नोटिस

On Date : 03 January, 2018, 9:50 PM
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रांची: विशेष सीबीआई अदालत ने नौ सौ पचास करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को 23 दिसंबर को दोषी ठहराये जाने के बाद अदालती फैसले के खिलाफ कथित बयानबाजी पर संज्ञान लेते हुए लालू के बेटे एवं बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी एवं शिवानंद तिवारी को बुधवार (3 जनवरी) को अवमानना नोटिस जारी किया और उन्हें 23 जनवरी को अदालत के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया.

केन्द्रीय जांच ब्यूरो की विशेष अदालत के न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने 23 दिसंबर को अदालत द्वारा लालू प्रसाद समेत 16 आरोपियों को चारा घोटाले के इस मामले में दोषी ठहराये जाने के बाद लालू के बेटे तेजस्वी यादव, रघुवंश प्रसाद सिंह, कांग्रेस नेता मनीष तिवारी एवं शिवानंद तिवारी द्वारा दिये गये बयानों पर संज्ञान लेते हुए अवमानना नोटिस जारी किया. अदालत ने सीबीआई के माध्यम से प्रेषित इस नोटिस में चारों आरोपियों को अदालत में 23 जनवरी को स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा है. अदालत ने नोटिस में पूछा है कि अदालती फैसले के बारे में दिये गये बयानों को देखते हुए क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए.

अदालत के बुधवार के इस फैसले के बाद राजद एवं कांग्रेस खेमे में सन्नाटा दिखायी दिया और अदालत परिसर में इन पार्टियों के नेता कोई भी बयान देने से बचते दिखे. राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा है. लेकिन इस मामले में जिस प्रकार लालू प्रसाद यादव को फंसाया गया है उसे देखते हुए इसे वह और उनकी पार्टी जनता की अदालत में ले जायेंगे और भाजपा को 2018 के आगे कहीं भी अपना पैर नहीं जमाने देंगे.

इससे पूर्व लालू प्रसाद यादव, आर के राणा, जगदीश शर्मा एवं तीन वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारियों समेत 16 आरोपियों को सीबीआई की यहां स्थित विशेष अदालत में बिरसा मुंडा जेल से लाकर पेश किया गया. अदालत ने इन सभी को 23 दिसंबर को इस मामले में दोषी करार देते हुए बिरसा मुंडा जेल भेज दिया था जबकि इसी मामले में अदालत ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, बिहार विधानसभा की लोक लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत समेत छह लोगों को भारी राहत दी थी एवं निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया था.

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