IIT कानपुर में होगी हिंदू धार्मिक ग्रंथों की पढ़ाई कहा...

On Date : 11 January, 2018, 11:47 AM
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कानपुर : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर पहला ऐसा इंजीनियरिंग कॉलेज बन गया है, जो हिन्दू ग्रंथों से संबंधित टेक्स्ट और ऑडियो सेवा देगा. आईआईटी के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध लिंक www.gitasupersite.iitk.ac.in. पर यह सेवा उपलब्ध है. अपलोड किए नौ पवित्र ग्रंथों में श्रीमद भगवद्गीता, रामचरितमानस, ब्रह्मा सूत्र, योगसूत्र, श्री राम मंगल दासजी और नारद भक्ति सूत्र शामिल हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान मिला था फंड
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, हाल ही में इस लिंक पर वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में लिखी रामायण के सुंदरकांड और बालककांड का अनुवाद भी जोड़ा गया है. हालांकि, आईआईटी स्वत: संचालित संस्थान है, लेकिन अक्सर उन्हें फंड देने वाला मानव संसाधन विकास मंत्रालय उनके चार्टर को विवादास्पद रूप में देखता है. इस परियोजना को तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की सूचना प्रौद्योगिकी के केन्द्रीय मंत्रालय ने 2001 में 25 लाख रुपये की फंडिंग देते हुए शुरू किया गया था.

आईआईटी कानपुर के रिसोर्स सेंटर फॉर इंडियन लैंग्वेज टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन, डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के प्रोफेसर टीवी प्रभाकर ने बताया, ''हमने समय-समय पर इस परियोजन पर आईआईटी के और बाहर के विद्वानों की मदद लेते हुए काम किया है, ताकि पवित्र ग्रंथों को उपलब्ध करवाया जा सके. यह भारत और दुनिया में अपनी तरह का पहला प्रयास है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए''.

आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर महेंद्र अग्रवाल और यहां कम्प्यूटर साइंस ऐंड इंजिनियरिंग के प्रफेसर टी वी प्रभाकर ने कॉलेज में हिंदू धार्मिक ग्रंथों की पढ़ाई पर विवाद की बात को खारिज कर दिया. प्रोफेसर प्रभाकर ने कहा, 'सभी अच्छी चीजों की आलोचना होती है. इतने महान और धार्मिक कार्य के लिए धर्मनिरपेक्षता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं.'

वेबसाइट के उद्देश्यों में से एक "वेदांत" को योग्य अधिकारी (कार्यकर्ता, अधिकारी, कर्मचारी) के ज्ञान के रूप में वर्णित किया गया है.

कई विशेषज्ञों की ली मदद
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के दर्शनशास्त्र में डॉक्टरेट डिग्री धारक विशेषज्ञों ने भगवद्गीता का अंग्रेजी ऑडियो में अनुवाद और स्वामी ब्रह्मानंद ने संस्कृत जप का अनुवाद किया है. अवधी में रामचरितमों का प्रस्तुतीकरण आईआईटी गुवाहाटी के फैकल्टी सदस्य देव अनानंद पाठक ने किया है. वहीं और पवित्र ग्रंथों को शामिल करने के लिए आईआईटी को केंद्र से और फंड की अपेक्षा है.

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