बहाने गढ़कर आवेदकों को भटकाया तो खैर नहीं

On Date : 13 October, 2017, 4:06 PM
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सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों को लेकर डीपीआई कमिश्नर ने डीईओ पर दिखाई नाराजगी
प्रदेश टुडे संवाददाता, जबलपुर

सीएम हेल्प लाइन प्रकरणों के निराकरण में स्थानीयय स्तर पर बरती जा रही लापरवाही को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) कमिश्नर नीरज दुबे ने कड़ी नाराजगी दिखाई है। दुबे ने जबलपुर जिला शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र कुमार चौकसे सहित अन्य जिलों के अधिकारियों से दो टूक कहा है कि ‘भुगतान कर दिया गया’, ‘छात्र पात्रता नहीं रखता है’,‘ पोर्टल से पात्रता प्रमाणित नहीं हो रही’अब यह कहने से काम नहीं चलेगा। ऐसा क्यों? हो रहा है इसका कारण स्पष्ट कारण बताना होगा। कमिश्नर नीरज दुबे ने कहा कि जिले के  अधिकारी अपनी उलझन को दूर करने के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल कर आवदेक भटकाते हैं और मुख्यालय को गुमराह करते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा अधिकारियों को हर हालात में सीएम प्रकरणों को निराकरण करना होगा।

बहाने नहीं, अब ये करना होगा
ल्ल सामान्य रूप से छात्रवृत्ति अथवा अन्य भुगतानों के मामले में किस योजना के अंतर्गत, किस अवधि का, कितनी राशि का भुगतान, किस बैंक खाते में, कब किया गया है, यह अंकित करना होगा। जिला शिक्षा अधिकारी को यह ध्यान रखना होगा कि स्कूलों से जो जानकारी आती है वह सही रहती है कि नहीं अगर जानकारी गलत पाए जाने पर उसके सुधार कर नए सिरे से जानकारी मंगवाई जाए।
ल्ल इसी तरह यदि छात्र को पात्रता नहीं आती है तो किस कारण से पात्रता नहीं आती है, इसका परीक्षण निचले स्तर पर होना अपेक्षित होगा। क्या छात्र पूर्व के वर्षों में फेल हो चुका है या निर्धारित आय वर्ग से आय ज्यादा हो गई है तथा ऐसा कौन सा कारण है कि जिसके कारण से छात्र अपात्र हो गया है स्पष्ट रूप से बताना होगा।
ल्ल पोर्टल के माध्यम से पात्रता स्थापित करना एक सुविधा है। पोर्टल में जो जानकारी आपके स्तर से अंंकित होती है उसी के आधार पर छात्र की पात्रता बनती है। ऐसे मामलों में भी पोर्टल प्रोफाइल अपडेशन के समय पर अंकित की गई जानकारी का मिलान, वास्तविक तथ्यों से जो हार्डकापी के रूप में विद्यालय में संधारित उससे करना होगा।

एल-1 स्तर पर प्रविष्टि 2 व 3 स्तर से परीक्षण ही नहीं होता
कमिशनर नीरज दुबे ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन प्रकरण की प्रविष्टि एल-1 स्तर के अधिकारी  तो करते हैं, किंतु 2 व 3 स्तर के अधिकारी इसका परीक्षण तक नहीं करते हैं और बगैर परीक्षण-निरारकण  के लिए प्रकरण एल-4 तक पहुंच जाता है। यह गलत है ऐसा करने वाले अधिकारियों पर अब अनुशासत्मक कार्रवाई की जाएगी।

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