चीन की तरह सॉफ्ट पॉवर और हार्ड पॉवर का इस्तेमाल करे भारत: थरूर

On Date : 13 April, 2017, 7:57 PM
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नई दिल्ली: अपनी नरम शक्ति (सॉफ्ट पॉवर) पर भारत की ओर से किए जा रहे गर्व के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आज कहा कि इससे कुछ ही दूरी तय की जा सकती है और असल कुशलता नरम और कठोर शक्तियों (हार्ड पॉवर) का एक साथ प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने में है, जैसा कि चीन बेहतर तरीके से कर रहा है। 
 
 
यहां इंडिया हैबिटेट सेंटर में ‘माई ड्राइवर ट्यूलोंग एंड अदर टॉल टेल्स फ्रॉम ए पोस्ट पोल पॉट कन्टेम्पररी कंबोडिया’ नाम की किताब के विमोचन के अवसर पर थरूर ने कहा, ‘नरम शक्ति के बगैर कठोर शक्ति का इस्तेमाल धौंसपट्टी दिखाने जैसा है, लेकिन सिर्फ नरम शक्ति भी अंतत: एक कमजोर ताकत होती है. बहरहाल, यदि आप दोनों शक्तियों का एक साथ प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करें तो यह अपने आप में उत्साहवर्धक होता है और अभी चीन यह काम बेहतर तरीके से कर रहा है.’ 
 
कंबोडिया, श्रीलंका और पड़ोसी देशों का हवाला देते हुए थरूर ने दलील दी कि भारत को इन देशों को थोड़ी अलग चीजों की पेशकश करने के बारे में सोचना चाहिए, क्योंकि यदि मामला संसाधन मुहैया कराने का है तो ‘भारतीय निवेश चीन के निवेश सरप्लस से तुलना नहीं कर सकता.’ उन्होंने कहा, ‘मैंने संसद में भी यह बात कही है कि भारतीय विदेश नीति की सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान नहीं है, यह वित्त मंत्रालय है. हमारे प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री विदेश जाते हैं और प्रतिबद्धताएं जताते हैं और जब मौका आता है तब वित्त मंत्रालय उन्हें पूरा करने से बेझिझक इनकार कर देता है.’ 
 
थरूर ने कहा, ‘और भारत की ओर से सहायता का इतिहास ऐसे वादों से भरा पड़ा है जिन्हें पूरा ही नहीं किया गया या बहुत धीमी गति से पूरा किया गया. यह सारी चीजें चीन के ठीक उलट हैं और मुझे ईमानदारी से ऐसा लगता है कि हम इन मामलों में चीन से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते.’ बहरहाल, खासकर कंबोडिया का जिक्र करते हुए पूर्व राजनयिक थरूर ने कहा कि भारत को उस देश में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि दुर्भाग्यवश अच्छी मंशा से किए गए कुछ काम भी योजना के मुताबिक नहीं हुए.
 
नरम शक्ति ऐसी अवधारणा है जिसमें कोई देश बगैर बल प्रयोग या दमन के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना प्रभाव कायम करता है या अपनी बातें मनवाता है. कठोर शक्ति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना प्रभाव कायम करने के लिए सैन्य या आर्थिक तरीकों का इस्तेमाल करने वाली अवधारणा है.

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