केरलः महिला ने सबरीमाला मंदिर में की प्रवेश की कोशिश

On Date : 20 November, 2017, 11:31 AM
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सबरीमाला : केरल के सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के प्रसिद्ध मंदिर में रविवार को 31 वर्षीय एक महिला ने प्रवेश करने का असफल प्रयास किया. इस मंदिर में 10 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिला श्रद्धालुओं को प्रवेश की इजाजत नहीं है. पुलिस सूत्रों ने मीडिया को बताया कि तेलंगाना के पश्चिम गोदावरी जिले की रहने वाली महिला को मंदिर परिसर ‘सन्नीधनम’ से उठाया गया . उससे पूछताछ की गई और उसका बयान दर्ज किया गया .

मंदिर की परंपरा के मुताबिक, भगवान अयप्पा को समर्पित मंदिर में 10-50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है . भगवान अयप्पा को ‘नैष्टिका ब्रह्मचारी’ माना जाता है .पार्वती नाम की इस महिला ने अपने हाथों में नारियल, घी, हल्दी और चंदन की पोटली ‘इरूमुडी’ भी नहीं ले रखी थी . उसने ‘सन्नीधनम’ तक पहुंचने के लिए एक अलग रास्ते का सहारा लिया.

आपको बता दें कि मंदिर परिसर तक जाने के लिए अमूमन श्रद्धालू 18 सीढ़ियों यानी ‘पथिनेम पदि’ का इस्तेमाल करते हैं. अपने पति, दो बच्चों और अपने गांव के 11 अन्य लोगों के साथ पहुंची महिला ने पुलिस को बताया कि उसे प्रतिबंधित आयु वर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर मनाही के बारे में पता नहीं था .संदेह होने पर पुलिस ने उसका पहचान-पत्र जांचा जिससे पता चला कि उसकी उम्र 31 साल है .

मंदिर तक पहुंचने के लिए सबरीमाला की चढ़ाई शुरू करने से पहले पम्पा में पुलिस महिलाओं के प्रवेश पर सख्त नजर रखती है. मंदिर सूत्रों को पता नहीं था कि महिला पुलिस की निगरानी को धता बताकर मंदिर तक कैसे पहुंची.आपको बता दें कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मामला सुप्रीम कोर्ट में है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को संवैधानिक पीठ को भेज है.

सबरीमाला मंदिर में परंपरा के अनुसार, 10 से 50 साल की महिलाओं की प्रवेश पर प्रतिबंध है. मंदिर ट्रस्ट की मानें तो यहां 1500 साल से महिलाओं के प्रवेश पर बैन है. इसके लिए कुछ धार्मिक कारण बताए जाते रहे हैं. वहीं केरल के यंग लॉयर्स एसोसिएशन ने बैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 2006 में पीआईएल दाखिल की थी. करीब 10 साल से यह मामला कोर्ट में अधर में लटका हुआ है. पिछले साल 7 नवंबर को केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी थी कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के समर्थन में है. केरल सरकार ने पिछले साल सात नवंबर को न्यायालय को सूचित किया था कि वह ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की पक्षधर है. शुरू में, 2007 में एलडीएफ सरकार ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की हिमायत करते हुये प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाया था जिसे कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रन्ट सरकार ने बदल दिया था.

यूडीएफ सरकार ने इस साल चुनाव हारने से अपना दृष्टिकोण बदलते हुये कहा था कि वह 10 से 50 आयु वर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश के खिलाफ है क्योंकि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. शीर्ष अदालत ने 11 जुलाई, 2016 को संकेत दिया था कि 10 से 50 साल की आयु की महिलाओं का सबरीमाला मंदिर में प्रवेश वजित करने संबंधी सदियों पुरानी परंपरा का मसला संविधान पीठ को भेजा जा सकता है क्योंकि यह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित है. न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की थी कि महिलाओं को भी सांविधानिक अधिकार प्राप्त है और यदि इसे संविधान पीठ को सौंपा जाता है तो वह इस बारे में विस्तृत आदेश पारित करेगा.

शीर्ष अदालत ने इससे पहले सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित करने संबंधी परंपरा पर सवाल उठाते हुये कहा कि वह इस बात की जांच करेगा कि क्या ‘आस्था और विश्वास’के आधार पर लोगों में अंतर किया जा सकता है. सबरीमाला मंदिर के प्रबंधकों ने इससे पहले न्यायालय से कहा था कि 10 से 50 साल की आयु की महिलाओं का इस मंदिर में प्रवेश निषेध है क्योंकि वे मासिक धर्म की वजह से ‘पवित्रता’बनाये नहीं रख सकती हैं.

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