नमामि गंगे कार्यक्रमः केंद्र ने उत्तराखंड में 905 करोड़ की 32 योजनाओं की रखी आधारशिला

On Date : 20 December, 2017, 11:29 PM
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देहरादूनः केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्‍य मंत्री डॉ. सत्‍यपाल सिंह तथा उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री त्रिवेन्‍द्र सिंह रावत की उपस्थिति में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत मंगलवार को उत्तराखंड में 905 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली 32 परियोजनाओं की आधारशिलाएं रखी गईं। इस अवसर पर मेजर भुवन चन्‍द्र खंडूरी, उत्तराखंड के पेयजल मंत्री प्रकाश पंत, उत्तराखंड के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज, संसद सदस्‍य रमेश पोखरियाल आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इस दौरान 12.83 करोड़ रुपए की लागत से तैयार दो सीवर शोधन परियोजनाओं (गंगोत्रीधाम में सीवर योजना और एसटीपी तथा बद्रीनाथ में 0.26 एमएलडी क्षमता वाली एसटीपी) का उद्घाटन किया गया।

डॉ. सत्‍यपाल सिंह ने कहा, ‘हमें गंगा स्‍वच्‍छता मिशन को जनांदोलन बनाना है। लोगों की मानसिकता में बदलाव की आवश्‍यकता है। लोगों को यह बताया जाना चाहिए कि वे नदी को किसी भी रूप में प्रदूषित न करें।’ उन्‍होंने नमामि गंगे कार्यक्रम में लोगों की सहभागिता के महत्‍व को रेखांकित किया। ‘हम लोगों ने लंदन और मुम्‍बई में दो सफल रोडशो आयोजित किए जिसमें उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने गंगा स्‍वच्‍छता मिशन में सहभागी बनने की इच्‍छा व्‍यक्‍त की’।

त्रिवेन्‍द्र सिंह रावत ने कहा कि, ‘हम लोगों में से प्रत्‍येक को भागीरथ बनने की जरूरत है। यही एकमात्र समाधान है।’ समाज के प्रत्‍येक सदस्‍य को इसमें भाग लेना पड़ेगा। सरकार के प्रयास काफी नहीं है। यदि हम सभी एकजुट होते हैं तो अविरल और निर्मल गंगा के सपने को निश्चित रूप से साकार किया जा सकेगा’।

32 परियोजनाओं में से 871.74 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली 20 परियोजनाएं सीवर शोधन तथा उत्तराखंड के विभिन्‍न भागों में आधारभूत संरचना के निर्माण से संबंधित हैं। छह परियोजनाएं हरिद्वार में लागू की जाएंगी। इसके अंतर्गत जगजीतपुर और सराय में दो एसटीपी का निर्माण किया जाएगा। हरिद्वार के परियोजनाओं की कुल लागत 414.20 करोड़ रुपए है।

सभी परियोजनाओं के पूरे होने के बाद हरिद्वार और ऋषिकेश समेत उत्तराखंड के सभी प्रमुख शहरों का पानी बिना शोधित हुए गंगा में नहीं जाएगा। इसके अतिरिक्‍त उत्तरकाशी, मुनि की रेती, कीर्ति नगर, श्रीनगर, रुद्र प्रयाग, बद्रीनाथ, जोशीमठ, चमोली, नंद प्रयाग और कर्ण प्रयाग में सीवेज शोधन परियोजनाओं की आधारशिलाएं रखी गईं। टिहरी गढ़वाल, रुद्र प्रयाग और चमोली में घाट विकास कार्यों के लिए आधारशिलाएं रखी गईं।

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