सूखने की कगार पर हैं कुंए,नहरें और तालाब

On Date : 13 January, 2018, 9:40 PM
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सूखे की मार से बुंदेलखंड में रोजगार व पानी का संकट
प्रदेश टुडे संवाददाता, छतरपुर
पिछले कई वर्षों से अल्प वर्षा की मार झेल रहे छतरपुर जिल समेत बुंदेलखंड में इस वर्ष भी सूखे के कारण जो हालात निर्मित हुए हैं उन हालातों को देखते हुए एक गंभीर समस्या किसानों के सामने उपस्थित रहो रही हेै। किसानों को जहां रोजी-रोटी के लिए परेशान होना पड़ेगा वहीं पशुओं के लिए भी पानी की विकराल समस्या उत्पन्न हो जायेगी। इन समस्याओं से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा कोई सार्थक उपया अभी तक शुरू नहीं किये गये हैं।
बुंदेलखंड के वाशिंदे बूंद-बूंद पानी और रोजगार के अभाव में घर-गांव को छोड़कर महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं। वहीं सरकार की तमाम जल संरक्षण की योजनाओं की असलियत खुलनी शुरू हो चुकी है। मनरेगा से बुंदेलखंड के 6 जिलों की प्यास बुझाने 84928.22 लाख रुपए भूमि और जल संरक्षण मद पर खर्च कर दिए गए यह राशि कहां गुम हो गई सर्व विदित है। सरकारी तंत्र नेताओं के गठजोड़ ने अपनी प्यास मिटा ली। सरकार के दावे के मुताबिक प्रदेश में 59037 जल संरचनाओं का निर्माण कर लिया गया है। सरकार और समाज  की संयुक्त भागीदारी से इस अभियान पर अब तक 816 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च की गई है। सत्ताधारी इस अभियान को अपनी भारी सफलता बताते नहीं थक रहे हैं सूखे में इन जल संरचनाओं के बाद भी बूंद-बूंद पानी के लिए युद्ध से हालात क्यों बनते हैं इसका जवाब कोई नहीं दे पा रहा है।
बुंदेलखंड आज भले ही अपने सूखे के लिए जाना जाता है लेकिन यह क्षेत्र अपने चंदेलकालीन तालाबों के लिए एक अलग पहचान बनाए हुए हैं। इन तालाबों के भरोसे ही 60 प्रतिशत भूमि की सिंचाई और ग्रीष्मकालीन समय में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होती थी लेकिन इस बार गर्मी आने से पहले ही यह तालाब सूख चुके हैं और कुछ आधुनिक शिक्षा ने इन्हें उपेक्षित किया है। कुछ नई तरह की योजनाओं ने लेकिन जो नई तरह की योजनाएं और परियोजनाएं आईं वह भी पूरी न हो सकीं, इस तरह परंपरागत तालाब अपना वजूद खो चुके हैं तो दूसरी तरफ नई तरह की योजनाएं भी लागू ना हो सकी। नतीजतन सूखा और जलाभाव जो समय के साथ-साथ गहराता चला गया। राजस्व विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बुंदेलखंड में सूखा के कारण किसान और खेतिहर मजदूर खेती करना बंद कर चुके थे और रोजी-रोटी की तलाश में पलायन कर जाते हैं।

रोजगार की तलाश में किया दिल्ली, पंजाब की ओर रुख
बुंदेलखंड का किसान मजदूरी करने दिल्ली, नोएडा,  हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर निकल गए हैं। सरकार ने जलाभिषेक अभियान वाटर शेड जैसी योजनाओं से संभाग में 2200 से अधिक स्टॉप डैम बनवाए जिनका निर्माण तो हुआ लेकिन स्टॉप डैम के फाटक नदारत होकर शोपीस बने हुए हैं। नतीजा बुंदेलखंड में वर्षा का जल नहीं ठहर  सका, जो पानी किसान के लिए सहेजना था उसकी जगह स्टाप डेमों में धूल उड़ रही है, मनरेगा से मेड बंधान, कपिलधारा कूप निर्माण भी हुआ लेकिन साठ फीसदी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई और किसान पथराई आंखों से सूखे की मार लगातार झेल रहा है।

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