2019 के लोकसभा चुनाव में BJP को मिलेगा रजनीकांत का समर्थन

On Date : 01 January, 2018, 5:27 PM
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चेन्नई : सुपरस्टार रजनीकांत ने राजनीति में आने का एलान कर दिल्ली की सियासत में गर्मी बढ़ा दी है। सबसे अधिक बेचैनी बीजेपी को है, इसका कारण यह है कि रजनी के एलान के तुरंत बाद ही तमिलनाडु के बीजेपी अध्यक्ष का एक बयान समाने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष तमिलिसै सौदरराजन ने ट्वीट कर दावा किया है कि "रजनीकांत 2021 में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार खड़े करेंगे, लेकिन इसके पहले वह 2019 में मोदी के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा होंगे। वह बीजेपी के नेचुरल पॉलिटिकल पार्टनर हैं और बीजेपी को आम चुनाव में जीत दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे।" बता दें कि रविवार को रजनीकांत ने कहा कि मैं पॉलिटिकल पार्टी बनाऊंगा और ये पार्टी तमिलनाडु असेंबली इलेक्शन में सभी विधानसभा सीटों पर लड़ेगी।

बीजेपी और रजनीकांत का एक है मकसद
तमिलिसै सौदरराजन ने ट्वीट में रजनीकांत और बीजेपी के मकसद को एक बताया है। उनका दावा है कि "2019 के लोकसभा चुनाव में रजनीकांत का समर्थन बीजेपी को मिलेगा। बीजेपी और रजनीकांत का साथ नेचुरल अलायंस होगा। नरेंद्र मोदी करप्शन का विरोध करते हैं इसी तरह इसी मकसद से रजनीकांत भी राजनीति में आ रहे हैं।

मोदी व रजनी के बीच मुलाकात
हालांकि पॉलिटिकल पार्टी बनाने के एलान के वक्त ही रजनीकांत यह साफ कर दिया कि 2019 के चुनाव में उनका समर्थन किसे मिलेगा। इस बात का फैसला भी वे उसी वक्त करेंगे। दरअसल, 2014 के इलेक्शन के वक्त ही ये कहा जा रहा था रजनीकांत बीजेपी ज्वाइन कर सकते हैं। 2014 के बाद मोदी और रजनीकांत की मुलाकातों से भी इन कयासों को और बल मिला। 2014 के आम चुनाव के बाद से ही बीजेपी तमिलनाडु में एक्टिव है। जयललिता की मौत के बाद भी यहां की राजनीति में मची उथल-पुथल को थामने में बीजेपी का बड़ा रोल रहा है। खेमों में बंटी एआईएडीएमके में सुलह करवाने में वेंकैया नायडू ने अहम रोल निभाया था। दरअसल, बीजेपी उस वक्त इलेक्शन नहीं चाहती थी, क्योंकि इससे डीएमके की संभावनाएं बढ़ जातीं। AIADMK और DMK के अलावा तमिलनाडु में रजनीकांत के रूप में तीसरा विकल्प खड़ा हो रहा है तो बीजेपी की कोशिश उसमें अहम रोल निभाने की रहेगी।

रजनीकांत के रूप में तीसरा विकल्प
पिछले 30 साल से तमिलनाडु की राजनीति करुणानिधि और जयललिता के इर्द-गिर्द घूमती रही है। करुणानिधि एक्टिव हैं, लेकिन अब उम्र 93 साल हो गई है। जयललिता की 5 दिसंबर 2016 में मृत्यु हो चुकी है। AIADMK के ई पलानीसामी मौजूदा सीएम हैं, लेकिन जनता में स्वीकार्यता ना के बराबर है। DMK के लीडर करुणानिधि के बेटे स्टालिन हैं। लेकिन, लोगों में उनकी लोकप्रियता करुणानिधि जैसी नहीं है। दोनों ही अहम पार्टियों में करुणानिधि और जयललिता के कद का लीडर नहीं है। इस पॉलिटिकल वैक्यूम का फायदा रजनीकांत जैसे सुपरस्टार उठा सकते हैं, क्योंकि तमिलनाडु में पहले भी एक्टर्स को लोगों ने लीडर के तौर पर स्वीकार भी किया और सत्ता भी सौंपी।

कांग्रेस व बीजेपी में लड़ाई
तमिलनाडु की राजनीति में भी कांग्रेस व बीजेपी परोक्ष रूप से लड़ाई में है। जिसका कारण यह है कि यहां की राजनीति DMK और AIADMK में विभाजित है। चुनावी नतीजों का ट्रेंड देखें तो यहां एक बार DMK तो दूसरी बार AIADMK जीतती है। हालांकि यह ट्रेंड 2016 में बदला है। AIADMK ने 136 सीटें जीतकर दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस DMK की पार्टनर है तो बीजेपी AIADMK का समर्थन करती है।

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