रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेजने पर SC ने लगाई रोक

On Date : 13 October, 2017, 5:59 PM
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नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस म्यांमार भेजने के सरकार के फैसले पर उठे विवाद को लेकर दायर याचिकाओं पर 21 नवंबर से विस्तृत सुनवाई की जायेगी। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस दौरान कोई आकस्मिक परिस्थितयां उत्पन्न होने पर याचिकाकर्ता निदान के लिये उसके पास आ सकते हैं। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है और इसलिए सरकार की इसमें बड़ी भूमिका है।

रोहिंग्या पर चल रही बहस के बीच कोर्ट अब इस बात पर भी नजर रखेगी कि अगली सुनवाई तक रोहिंग्या रिफ्यूजी को देश से न निकाला जाए। साथ ही कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरी है, लेकिन रोहिंग्या रिफ्यूजियों के अधिकारों को भी हमें ध्यान में रखना होगा।

इस मामले में आज संक्षिप्त सुनवाई के दौरान पीठ ने रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस नहीं भेजने का केन्द्र को सुझाव दिया परंतु अतिरिक्त सालिलसीटर जनरल तुषार मेहता ने इसे आदेश में नहीं लिखने का अनुरोध किया क्योंकि किसी भी ऐसे तथ्य के रिकार्ड में आने के अंतर्राष्ट्रीय नतीजे होंगे। अतिरिक्त सालिसीटर जनरल ने कहा कि हमें अपनी जिम्मेदारी मालूम है। पीठ ने कहा कि समूचे रोहिंग्या मुस्लिमों के मसले को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक हित, श्रमिक हित और बच्चों, महिलाओं, बीमार और निर्दोष व्यक्तियों जैसे विभिन्न पहलुओं से देखना होगा।

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