संत और दद्दू ने लगाया दम

On Date : 13 October, 2017, 2:35 PM
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22 साल बाद राजपूत हितकारिणी सभा के चुनाव
प्रदेश टुडे संवाददाता, ग्वालियर।

राजपूत हितकारिणी सभा और ग्वालियर स्टेट राजपूत छात्रावास के चुनावों को लेकर क्षत्रिय समाज की राजनीति पूरे चरम पर है। इसके लिए मौजूदा अध्यक्ष संत कृपाल सिंह और धीरसिंह तोमर के बीच कड़े मुकाबले के हालात बने हुए हैं। इस बीच दोनों ही खेमे अपनी-अपनी जीत के लिए दमखम लगाने के साथ-साथ एक दूसरे पर संगीन आरोप लगा रहे हैं। गौरतलब है कि हितकारिणी सभा के चुनाव 22 साल बाद कल 14 अक्टूबर को होने जा रहे हैं, जिसको लेकर तमाम उठापटक का दौर जारी है।

पद लोलुपता ने बिगाड़े हालात: धीरसिंह
मौजूदा अध्यक्ष की पद लोलुपता, हितकारिणी सभा की सम्पत्तियों पर जमी नजर और वंशवाद के कारण पिछले 22 साल से संस्था के चुनाव नहीं हो पााए। संत का चोला पहनने वालों के इस आचरण के चलते संस्था की छवि खराब होने से समाज में भारी आक्रोश है। यह कहना है हितकारिणी सभा के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार धीरसिंह तोमर ‘दद्दू’ का।
 पत्रकारों से चर्चा करते हुए श्री तोमर ने कहा कि इसी के चलते समाज के तमाम जिम्मेदार लोगों के आग्रह पर मैं चुनाव मैदान में हूं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजपूत छात्रावास में रहने वाले छात्रों को लंबे समय से बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं और नियंत्रण व अनुशासन नहीं होने से वहां अराजकता का माहौल है। पहले जिस बोर्डिंग से पहले आईएएस, आईपीएस सहित तमाम प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्र सफल होते थे वहीं अब अपराधिक घटनाओं के लिए उसकी चर्चा होती है। चर्चा के दौरान जयसिंह भदौरिया ने मौजूदा अध्यक्ष पर कई संगीन आरोप लगाए। इस मौके पर जयसिंह कुशवाह, केपीएस भदौरिया, राजेन्द्र भदौरिया, राजवीर सिंह राठौर, शिववीर सिंह भदौरिया आदि मौजूद रहे।

समाज हित में संभाला पद: संत कृपाल
मेरे ऊपर लगाए गए राजपूत हितकारिणी सभा की सम्पत्ति को खुर्दबुर्द किए जाने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। इसी तरह विरोधी पक्ष की ओर से मुझ पर लगाए गए वंशवाद के आरोप भी उनकी कमजोरी को दर्शाते हैं। यह कहना है सभा के मौजूदा अध्यक्ष संत कृपाल सिंह का। वह बीते रोज यहां पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।
उनका कहना है कि सकारात्मक और संगठनात्मक गतिविधियों के साथ समाज के हित में मैने राजपूत हितकारिणी सभा का अध्यक्ष पद स्वीकार किया था। इसी उद्देश्य से समाज बंधुओं की भावना कोे देखते हुए मैं अब चुनाव मैदान में भी हूं और सभी का भरपूर सहयोग एवं साथ मिल रहा है। दूसरे पक्ष की ओर से लगाए गए वंशवाद के आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार के कई लोग समाजसेवा में आना चाहते हैं तो उनको रोका नहीं जा सकता। जहां तक 22 साल से चुनाव नहीं होने पाने की बात है तो इसके लिए वह लोग दोषी हैं जो इस मसले को कोर्ट में लेकर गए। वहीं चुनाव को लेकर उन्होंने भरपूर समर्थन मिलने का भी दावा किया है।

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