पूर्व प्राचार्य ने जीवन बर्बाद किया न्याय दो या फिर मौत की इजाजत

On Date : 17 April, 2018, 3:20 PM
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मॉडल स्कूल की निलंबित दिव्यांग शिक्षिका ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र
प्रदेश टुडे संवाददाता, जबलपुर
 पं. लज्जा शंकर झा उत्कृष्ट विद्यालय के पूर्व प्राचार्य व सहायक संचालक डीईओ आफिस घनश्याम सोनी के खिलाफ एक बार फिर स्कूल की एक दिव्यांग शिक्षिका ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होने शिक्षा मंत्री डॉ.कुंवर विजय शाह को चिट्ठी भेजकर कहा कि पूर्व प्राचार्य ने उसका जीवन बर्बाद कर दिया, 5 साल से वह निलंबन समाप्त के लिए दर-दर भटक रही है, लेकिल न्याय नहीं मिला। दिव्यांग शिक्षिका ने न्याय की गुहार लगाते हुए  शिक्षा मंत्री से मौत की इजाजत मांगी है। दिव्यांग शिक्षिका ने स्कूल शिक्षा विभाग ने खलबली मचा दी है।  शिक्षिका दीप्ति श्रीवास्तव का आरोप है कि पूर्व प्राचार्य घनश्याम सोनी द्वारा बेवजह उसे निलंबित करवाया गया।
5 साल पहले की गई कार्रवाई पर विभाग ने आज तक उन्हें बहाल नहीं किया। दीप्ति ने बताया कि व्याख्याता किरण राव द्वारा साल 2012  में पूर्व प्राचार्य घनश्याम सोनी  से उनकी एक झूठी शिकायत कराई गई  कि वह उन्हें देखकर गाना गाती है, मोबाइल से फोटो उतारती है।  इस झूठी शिकायत के आधार पर पूर्व प्राचार्य ने जांच पड़ताल किए बिना ही डीईओ के माध्यम से कमिश्नर को प्रस्ताव भेज दिया जहां से सुनवाई बिना ही निलंबित कर दिया गया है।

दिव्यांग शिक्षिका ने शिक्षा मंत्री को  लिखा
साल 2006 में  मूल्यांकन को लेकर पूर्व प्राचार्य से  हुआ था विवाद
टीचर कीरत सिंह कौरव के माध्यम से धमकाया गया, कलेक्टर से शिकायत की
2009 में पूर्व प्राचार्य सोनी की शिकायत तत्कालीन कलेक्टर हरिरंजन राव से करना महंगा पड़ा
5 माह बाद कलेक्टर  का ट्रांसफर होने के बाद तत्कालीन सहायक संचालक शांति बवारिया से आर्डर पास कराया, कलेक्टर द्वारा जांच को निरस्त कराया।
तत्कालीन डीईओ रवीन्द्र सिंह ने भी विकलांग शिक्षिका की शिकायत पर डीपीआई को पूर्व प्राचार्य के ट्रांसफर के लिए लिखा था।
पूर्व प्राचार्य ने 2010 में ट्रांसफर के लिए संजय उपाध्याय, रीना जैन, अलेखा तिवारी,डीआर पटेल और दीप्ति श्रीवास्तव का नाम रखा गया
ट्रांसफर  नहीं हुआ, पूर्व प्राचार्य ने फिर 2011 में कोशिश की तो आर्डर आ गए।
आरटीआई में जानकारी मांगी तो मालूम हुआ कि हमने ट्रांसफर मांगा, जबकि ट्रांसफर मांगा ही नहीं गया।
2011 में ही न्यायालय की शरण में ली तो वहां से ट्रांसफर के लिए स्टे प्राप्त हुआ।
पूर्व प्राचार्य ने कारण बताओ नोटिस जारी किया, किंतु जवाब नहीं सुना, आनन-फानन में कमेटी बनाई। जांच कराई और तत्कालीन डीईओ को सौंप दी।
तत्कालीन डीईओ ने सुनवाई के लिए मौका नहीं दिया, और कमिश्नर को फाइल भेज दी, वहां से निलंबित कर दिया गया।
जनसुनवाई में पहुंचकर पूर्व प्राचार्य की शिकायत पर तत्कालीन कलेक्टर ने नहीं सुनी समस्या।
स्थानीय से लेकर मुख्यालय तक के अधिकारी विकलांग शिक्षिका के खिलाफ हो गए।

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