जयललिता के आखिरी दिनों का विडियो जांच आयोग को सौंपा

On Date : 27 December, 2017, 12:23 PM
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चेन्नई : तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता का विवादित वीडियो फुटेज उनकी मृत्यु के मामले की जांच कर रहे एक सदस्यीय जांच आयोग को दिया गया है, जिसमें वह कथित रूप से अस्पताल में दिखाई दे रही हैं. अन्नाद्रमुक सुप्रीमो की मौत की परिस्थितियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में 15 दिसंबर को अपोलो हॉस्पिटल ने वीडियो जारी किया था जिसमें जयललिता अपने हाथों से जूस का गिलास पकड़े नजर आ रही हैं. अन्नाद्रमुक के विद्रोही नेता पी वेट्रिवेल ने न्यायमूर्ति ए अरूमुगास्वामी आयोग को यह वीडियो एक सीडी में मुहैया करवाया है.

वेट्रिवेल ने 21 दिसंबर को हुए आर के नगर विधानसभा उप चुनाव से पहले यह वीडियो क्लिप मीडिया को भी जारी किया था. अन्नाद्रमुक से अलग-थलग किए गए नेता टीटीवी दिनाकरण के विश्वस्त वेट्रिवेल से जब पीटीआई ने पूछा किया क्या यह वीडियो आयोग को दिया गया है तो उन्होंने सकारात्मक उत्तर दिया.

अपोलो अस्पताल के शीर्ष अधिकारी ने 15 दिसंबर को कहा था कि तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता को पिछले साल 22 सितंबर को जब अस्पताल लाया गया था तो उनकी ‘सांस नहीं चल रही थी.’ उन्होंने बताया था कि उपचार के दौरान उनके साथ वही लोग थे, जिनके नामों की उन्होंने मंजूरी दी थी.

आपको बता दें कि अन्नाद्रमुक सुप्रीमो 75 दिन अस्पताल में रहीं. इसके बाद पिछले साल पांच दिसंबर को उनका निधन हो गया. अपोलो अस्पताल की उपाध्यक्ष प्रीता रेड्डी ने नई दिल्ली में एक निजी टीवी चैनल को बताया था कि उन्हें (जयललिता को) जब अस्पताल लाया गया था तो उनकी सांस नहीं चल रही थी, उनका उचित इलाज किया गया और उनकी स्थिति बेहतर हुई.

उन्होंने कहा, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण रूप से आखिरकार वो हुआ जो कोई नहीं चाहता था. और वह कुछ ऐसा था जिस पर किसी का वश नहीं.’’ उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर कुछ लोगों द्वारा सवाल खड़े किए जाने से जुड़े एक अन्य सवाल के जवाब में रेड्डी ने कहा कि अस्पताल ने नई दिल्ली और विदेश के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सकों से उनका उपचार करवाया.

उन्होंने कहा, ‘‘जांच हो रही है और मुझे लगता है वह सबसे अच्छी चीज है. उनको आंकड़े देखने दीजिए...मेरे ख्याल से उसके बाद सारे रहस्य सुलझ जाएंगे.’’ रेड्डी से जब पूछा गया कि जयललिता के उपचार के समय उनके साथ कौन-कौन था तो उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुरूप और दिवंगत मुख्यमंत्री ने जिन लोगों की स्वीकृति दी थी, वे ही इलाज के दौरान उनके साथ थे.

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