2019 का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा भी उतना ही तेजी पकड़ रहा है. इस मसले पर जहां सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, वहीं दूसरी तरफ कोर्ट के बाहर भी केस से जुड़े संगठन अपनी-अपनी रणनीति में जुटे हुए हैं. रविवार को दिल्ली में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा की गई.

बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया गया कि बाबरी मस्जिद मामले को सुप्रीम कोर्ट की लार्जर बेंच के सामने ले जाया जाएगा. हालांकि, अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रही बाबरी मस्जिद केस की सुनवाई पर बोर्ड ने संतुष्टि जताई है, लेकिन इस बिंदु पर भी सहमति बनी है कि केस को बड़ी बेंच के सामने ले जाया जाएगा.

क्या है वजह

दरअसल, अभी सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच इस केस की सुनवाई कर रही है. बाबरी मस्जिद से जुड़े पक्षकारों और मुस्लिम संगठनों का मानना है कि यह मामला बहुत बड़ा और पेचीदा है, इसलिए तीन से ज्यादा जजों की बेंच को इस मसले पर सुनवाई करनी चाहिए.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य सैयद कासिम रसूल इलियास ने आजतक से बातचीत में बताया कि इस तरह की मांग लगातार आ रही थीं, जिसके बाद आज की बैठक में इस पर सहमति बनी है. उनके मुताबिक, अगर लार्जर बेंच इस केस की सुनवाई करता है तो हर दृष्टिकोण से इस पर सुनवाई की संभावनाएं बढ़ जाएंगी. वहीं, तीन तलाक पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भी बोर्ड सचेत है, जिसमें पांच जजों की बेंच में से तीन ने ट्रिपल तलाक को कुरान के खिलाफ मानते हुए असंवैधानिक ठहराया था, जबकि बाकी दो जजों ने इस पर सरकार से कानून लाने की बात कही थी. हालांकि, रविवार की मीटिंग में बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया वह बाबरी मस्जिद पर अभी तक की सुनवाई से संतुष्ट है.

बता दें कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की पीठ इस मसले पर सुनवाई कर रही है. इस केस को लार्जर बेंच के सामने ले जाने का फैसला काफी अहम माना जा रहा है.

दरअसल, बीजेपी से जुड़े नेता और राम मंदिर निर्माण के पक्षधर अक्सर 2019 से पहले अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के दावे करते रहे हैं. बीजेपी सांसद साक्षी महाराज से लेकर सुब्रमण्यम स्वामी तक सार्वजनिक मंच से 2019 चुनाव से पहले मंदिर निर्माण की बात कह चुके हैं. दूसरी तरफ यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी है कि मुस्लिम पक्षकार राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के मामले को टालने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में अगर ये केस लार्जर बेंच के पास जाता है तो सुनवाई और लंबी चलने की संभावना भी बन सकती है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2010 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित 2.77 एकड़ भूमि को निर्मोही अखाड़ा, भगवान राम और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बांट दिया था.