लखनऊः यूपी की सत्ता से बेदखल सपा ने अब पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में विस चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। सपा ने भी मध्य प्रदेश राज्य में विस चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। हिंदी भाषी राज्य मध्य प्रदेश में पार्टी संगठन लंबे समय से ग्रासरूट पर कार्य भी कर रहा है बावजूद इसके उसे अभी तक मनचाही कामयाबी नहीं मिली है। पार्टी संगठन काे आैर मजबूत बनाने के लिए अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुद मैदान में उतरने का मन बनाया है। खबराें के मुताबिक अखिलेश यादव 19, 20 जुलाई काे मध्य प्रदेश का दाैरा करेंगे।

बता दें कि इससे पहले अखिलेश यादव ने लखनऊ कार्यालय पर बीते दिनों हुई बैठक में म.प्र. के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव को सागर जिले की कम से कम एक सीट जिताकर देने के निर्देश दिये थे। इसके साथ ही अखिलेश ने पार्टी के युवा संगठनों के करीब एक दर्जन नेताओं को मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में चुनाव के लिए जमीनी आधार तलाशने के लिए भेजा था। इन सभी ने अभी एक सप्ताह पहले ही वहां से लौटकर अपनी रिपोर्ट अखिलेश यादव को सौंपी है। युवा नेताओं की रिपोर्ट के बाद ही अखिलेश यादव ने अब मध्य प्रदेश में अपने दौरे का कार्यक्रम तय किया है।

यूपी से सटे जिलाें में चुनाव लड़ने का विचार
छतरपुर जिला यूपी के झांसी जिले से लगा हुआ है। इसी जिले से समाजवादी पार्टी पूर्व में छतरपुर विधानसभा सीट जीत चुकी है। जानकारों की मानें तो सपा अध्यक्ष मध्य प्रदेश के भिण्ड, दतिया, मुरैना, छतरपुर, सीधी, रीवा, सतना, कटनी, चित्रकूट समेत करीब एक दर्जन जिलों में पार्टी प्रत्याशी उतारना चाहती है।

सपा काे राष्ट्रीय पार्टी बनाना भी है लक्ष्य
उत्तर प्रदेश में कई बार सरकार बनाने के बावजूद भी सपा से क्षेत्रीय पार्टी का टैग नहीं हटा है। अखिलेश अब पार्टी काे राष्ट्रीय पार्टी बनाने का दर्जा दिलाने की रणनीति बना रहे हैं। सपा इस साल तीन राज्यों में होने वाले चुनाव में हिस्सा लेगी। हालांकि इन राज्यों में सपा का कोई वजूद नहीं है। लिहाजा अखिलेश की नजर राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए जरूरी वोटों पर है।

गुजरात-कर्नाटक चुनाव में लगा पार्टी काे बड़ा झटका
गुजरात चुनाव में भी सपा ने छह प्रत्याशियों को उतारा था, लेकिन वह भी अपनी जमानत नहीं बचा पाए। वहीं हाल ही में हुए कर्नाटक चुनाव में भी पार्टी का यही हाल रहा, जबकि बसपा को कर्नाटक में एक सीट मिली। हालांकि कुछ साल पहले सपा के मध्य प्रदेश में चार विधायक थे और महाराष्ट्र में दो विधायक थे, लेकिन अब पार्टी का किसी भी राज्य में विधायक नहीं है, जिसके कारण सपा को राज्य स्तरीय पार्टी का ही दर्जा मिला हुआ है।