नई दिल्‍ली : मोदी सरकार के खिलाफ आज यानी 20 जुलाई को लोकसभा में अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर चर्चा होगी. जाहिर है इस चर्चा के दौरान बीजेपी सरकार और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग होगी. विपक्ष सरकार के खिलाफ असंतुष्‍ट दलों का साथ पाकर उसको घेरने की तैयारी में है तो वहीं संख्‍या बल में अधिक होने के कारण बीजेपी भी अधिक से अधिक समर्थन जुटाकर विपक्ष के मंसूबों पर पानी फेरने की पूरी कोशिश में है. शुक्रवार को संसद में विपक्ष और सरकार के बीच होने वाली यह जंग 2019 के लोकसभा चुनाव में भी राजनीतिक दलों की तस्‍वीर के लिए भी निर्णायक साबित हो सकती है. चर्चा की शुरुआत टीडीपी के प्रस्ताव पर पार्टी नेता के भाषण से होगी. वहीं इसका समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे.

सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाला मुख्य दल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) शुक्रवार को लोकसभा में इस पर चर्चा की शुरुआत करेगा और अध्यक्ष ने उसे बोलने के लिए 13 मिनट का समय दिया है. पार्टी की ओर से जयदेव गल्ला पहले वक्ता होंगे. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को प्रस्ताव पर अपने विचार रखने के लिए 38 मिनट का समय दिया गया है. कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी और सदन में पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इस पर बोल सकते हैं. अन्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल (बीजद), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) को क्रमश : 29 मिनट, 27 मिनट, 15 मिनट और नौ मिनट का समय दिया गया है.

वहीं संसद में बीजेपी को ओर से चर्चा की शुरुआत राकेश सिंह करेंगे. शुक्रवार को चअविश्‍वास प्रस्‍ताव पर चर्चा के दौरान ना तो प्रश्नकाल होगा, ना ही लंच ब्रेक होगा. यहां तक कि शुक्रवार को होने वाला निजी विधेयक का समय भी अगले सप्ताह तक के लिए टाल दिया गया है. 11 से लगातार 6 बजे तक होगा भाषणों का दौर चलेगा. सदन में बहुमत वाली सत्तारूढ़ बीजेपी को चर्चा में तीन घंटे और 33 मिनट का समय दिया गया है.

बता दें कि बीजद के सांसद जय पांडा का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया गया है. बीजद से उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. साथ ही लोकसभा से भी इस्‍तीफा देने की घोषणा की थी. इसे स्‍वीकार कर लिया गया है. इस तरह सदन में अब 11 सीटें कम हो गई हैं. ऐसे में सदन की संख्या घटकर 534 हो गई है. इसमें स्पीकर और दो मनोनीत भी शामिल है.  स्पीकर को मिलाकर बीजेपी की अपनी संख्या ही 274 है. एनडीए की संख्या शिवसेना, राजू शेठी और अम्बुमणि रामदौस को मिलाकर है. इनको बीजेपी NDA में मानकर अपने पाले में मान रही है.

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कोर ग्रुप के साथ बैठकर अविश्वास प्रस्ताव पर पार्टी की रणनीति को अंतिम रूप दिया है. इसके अलावा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने भी पार्टी सचेतकों और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकर उस रणनीति को अंजाम तक पहुंचाने पर विचार किया. पार्टी के व्हिप का असर रहा या उस रणनीति का असर की शत्रुघ्न सिन्हा जैसे नेताओं के भी सुर बदल गए हैं. संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने भी संकेत दिया कि दक्षिण से लेकर पूर्व तक उन्‍हें समर्थन है. जिस तरह से एडीएमके और टीआरएस ने अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन देने से पाला झाड़ा है, उससे साफ दिखता है कि ये दल विपक्ष के गेम में साथ नहीं है.