मुंबई: महाराष्ट्र में एनडीए गठबंधन टूटना लगभग तय हो गया है. बीजेपी के बाद शिवसेना ने सोमवार को ऐलान किया कि वह 2019 में होने वाला लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेगी. शिवसेना ने कहा कि 25 साल से वे इस गठबंधन में सड़ रहे थे. गौर करने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र और केंद्र में बीजेपी और शिवसेना मिलकर सरकार चला रहे हैं. शिवसेना ने भले ही गठबंधन से अलग होने की बात कही है, लेकिन अभी तक दोनों सरकारों में उसके नेता मंत्री परिषद का हिस्सा हैं. संसद में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान शिवसेना ने मोदी सरकार का समर्थन नहीं किया था. इसके बाद दोनों दलों के बीच दूरियां बढ़ गई हैं.

मालूम हो कि शिवसेना और बीजेपी लंबे समय से एक साथ हैं. हालांकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दोनों दलों में ठकराव शुरू हो गया था. इसी कारण दोनों विधानसभा चुनाव में अलग-अलग उतरे थे. हालांकि किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलने के चलते दोनों दलों ने मिलकर सरकार बनाई थी. इसके बाद भी दोनों के बीच टकराव चलते रहे. मुंबई नगर निगम चुनाव और उपचुनावों में दोनों दलों ने अलग-अलग भाग्य आजमाए हैं.

शुक्रवार को संसद में मॉनसून सत्र कें दौरान विपक्षी दलों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर भी शिवसेना ने सरकार का साथ नहीं दिया, बल्कि सदन की बहस में भी हिस्सा नहीं लिया था. इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने आगामी लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में अकेले ही चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं.

बता दें कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान शिवसेना ने पहले तो प्रस्‍ताव के विरोध में वोट करने के लिए व्हिप जारी किया था लेकिन बाद में व्हिप वापस ले लिया था. इतना ही नहीं शिवसेना नेताओं ने संसद में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषण की भी जमकर तारीफ की थी. शिवसेना के इस कदम से बीजेपी नाराज है. महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं और विधानसभा की 288 सीटें हैं और दोनों ही जगहों पर शिवसेना और बीजेपी के बीच तालमेल है. इतना ही नहीं बीएमसी में भी दोनों ही दलों के गठबंधन की सरकार है.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह रविवार को महाराष्ट्र के दौरे पर थे. इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र बीजेपी नेताओं और सगंठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक बैठक भी की. बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को आगामी लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए संगठन को मजबूत और चुनावों की तैयारी करने के लिए कहा. उन्होंने तो यहां तक कहा कि सूबे में बीजेपी की स्थिति इतनी मजबूत होनी चाहिए कि अगर शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी मिलकर भी चुनाव लड़ें तो बीजेपी को ना हरा सकें.