नई दिल्ली: स्टेट बैंक और जीवन बीमा निगम सहित कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने बैंक समूह से दिये गये 50 करोड़ अथवा इससे अधिक के फंसे कर्ज के त्वरित निपटान के लिये महत्वपूर्ण अंतर-ऋणदाता समझौता किया है, जिसमें लीड बैंक की अग्रणी भूमिका को मान्यता दी गयी है. वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने इस पहल को बैंकिंग उद्योग की मौजूदा समस्या के समाधान की दिशा में 'बड़ा कदम' बताया है. समझौते पर भारत डाक बैंक सहित सार्वजनिक क्षेत्र के कुल 22 बैंकों, निजी क्षेत्र के 19 बैंक और 32 विदेशी बैंकों द्वारा हस्ताक्षर किये जा रहे हैं. इसके अलावा जीवन बीमा निगम, हुडको, पॉवर फाइनेंस कारपोरेशन और आरईसी सहित 12 प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने भी इस समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं.

कई साल से फंसे कर्ज के त्वरित समाधान का मामला अटका
वित्त मंत्री गोयल ने इस समझौते पर कहा कि करीब-करीब पूरी बैंकिंग प्रणाली और आरईसी, पीएफसी जैसे प्रमुख गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान इस समझौते में शामिल हो रहे हैं. ऐसा समझौता नहीं होने की वजह से अब तक कई साल से फंसे कर्ज के त्वरित समाधान का मामला अटका हुआ था. उन्होंने कहा कि आईसीआईसीआई बैंक भी निदेशक मंडल की मंजूरी लेने के बाद इसमें शामिल हो रहा है. इसके अलावा कई अन्य बैंक इस समझौते का हिस्सा बन रहे हैं. अंतर-ऋणदाता समझौता बैंक खुद तैयार करेंगे और इससे बैंकों द्वारा मिलकर बैंकिंग क्षेत्र की समस्या का समाधान ढूंढने के संकल्प का पता चलता है. उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा कदम है, यह ऐतिहासिक मौका है. यह आईबीसी के दायरे में है. यह कोई समानांतर प्रणाली नहीं है. पूरी प्रक्रिया को तैयार कर लिया गया है और इससे तय दिशानिर्देशों और नियमों के दायरे में ही समस्या का त्वरित समाधान किया जा सकेगा.

ऋणदाताओं के समक्ष मंजूरी के लिए पेश होगी समाधान योजना
इस समझौते के तहत बैंक समूहों में जिसके नेतृत्व में कर्ज दिया गया है, वह एक निगरानी समिति को समाधान योजना सौंपेगा. यह पूरी योजना 'सशक्त' का हिस्सा है. एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि समूह में जिसने सबसे ज्यादा कर्ज दिया होता है वही लीड बैंक होता है, वही समाधान योजना बनाने के लिये प्राधिकृत होगा. उसकी समाधान योजना को ऋणदाताओं के समक्ष मंजूरी के लिये रखा जायेगा. प्रमुख ऋणदाता को समाधान योजना को निगरानी समति की सिफारिशों के साथ सभी संबंधित ऋणदाताओं को सौंपना होगा. समाधान योजना को अग्रणी प्रमुख बैंक को 180 दिन के भीतर अमल में लाना होगा. इस तरह के समझौते को भारतीय बैंक संघ के तत्वाधान में बनाई गई सुनील मेहता समिति की सिफारिश पर तैयार किया गया है. इस तरह के समझौते को विभिन्न ऋणदाता संस्थानों के निदेशक मंडल से भी मंजूरी दी गई है. देश में बैंकों का फंसा कर्ज यानी गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) दिसंबर 2017 की समाप्ति पर नौ लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया है. रिजर्व बैंक ने आने वाले दिनों में ऐसी संपत्ति के बढ़ने को लेकर सतर्क भी किया है.