जयपुर: अलवर हत्याकांड में राजस्थान सरकार के बयान से नया मोड़ आ गया है. वसुंधरा सरकार के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा है कि रकबर की मौत मॉब लिचिंग की वजह नहीं है बल्कि पुलिस कस्टडी में मौत हुई, इस मामले की जांच जारी है. उन्होंने कहा है कि हमने जांच रिपोर्ट सौंप दी है. बता दें कि पुलिस की भूमिका पहले से ही सवालों के घेरे में है. गुलाब चंद्र कटारिया ने घटना स्थल का दौरा कर पूरे मामले में अब तक की जांच की समीक्षा की. राजस्थान के अलवर जिले में 21 जुलाई को गाय तस्करी के संदेह में भीड़ ने रकबर की पीट पीटकर हत्या कर दी थी.

क्या कहा गुलाब चंद्र कटारिया ने ?
राजस्थान के गृहमंत्री गुलाब चंद्र कटारिया ने कहा, ''घटना पूरी जांच के बाद यह बात लगभग स्पष्ट है कि पुलिस वाले रकबर को थाने लेकर आ गए, इसके पहले उन्होंने रास्ते में चाय भी. पुलिस वाले रकबर को अस्पताल ले जाने के बजाए पहले गायों को गोशाला लेकर गए. जो उन्हें नहीं करना था. सबसे पहला काम उनका था कि थाने ले जाने पहले उस आदमी को अस्पताल ले जाते और जो भी इलाज की जरूरत होती वो कराते. इस वजह से हमारी जांच रिपोर्ट के बाद हमने एएसआई को सस्पेंड किया और उसके चार अन्य साथियों को लाइन हाजिर किया.''

उन्होंने कहा, ''इस मामले में जो सबूत हमने इकट्ठे किए हैं उसके मुताबिक रकबर की मौत पुलिस की हिरासत में हुई. घटनास्थल से 300 मीटर की दूरी पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है. हमने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है.''

सस्पेंड ASI मोहन सिंह का वीडियो वायरल, कहा- गलती हुई थी
रकबर की मौत में पुलिस की लापरवाही भी एक बड़ा कारण बनकर सामने आ रही है. इसमें मुख्य रूप से एएसआई मोहन सिंह जो मौके पर भी गए और घायल को उठा कर लाये. एएसाई मोहन सिंह के घायल रकबर को अस्पताल पहुंचाने में उसकी मौत का कारण बनी. अब एएसआई मोहन सिंह का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वो कह रहा है कि साहब गलती तो हो ही गई अब जो सजा देनी है दे दो. वीडियो में मोहन सिंह कह रहा है कि मेरे से गलती हो गई. मैंने तो साहब से कह दिया कि गलती हो गई. कैसे भी मान लो, सजा दो चाहे छोड़ दो.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 12 चोट के निशान और टूटी हड्डी-पसली
रकबर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है जिसमें पिटाई से ही मौत की बात सामने आई है. रकबर के शरीर पर चोट के 12 निशान मिले हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एक हाथ, एक पैर की पसलियां टूटी होने की बात सामने आई है. राजस्थान के अलवर जिले में 21 जुलाई को गाय तस्करी के संदेह में भीड़ ने रकबर की पीट पीटकर हत्या कर दी थी.

रकबर की मौत में पुलिस का भी हाथ हो सकता है!
सीक्वेंस ऑफ क्राइम जो धीरे धीरे सामने आ रहा है उससे एक शक ये भी गहरा रहा है कि रकबर की मौत में पुलिस का भी हाथ हो सकता है. चार सबूत और चश्मदीद सामने आ चुके हैं. पहला सबूत वो तस्वीर जो रामगढ़ थाने की है जहां पिटाई के बाद पुलिस जख्मी हालत में रकबर को लेकर आई. थाने मे बैठा था रकबर यानी तब तक जिंदा था, फिर उसकी मौत हुई.

दूसरा सबूत नवल किशोर शर्मा नाम का शख्स पेश कर रहा है कि पुलिस की पिटाई से उसकी मौत हुई. तीसरा चाय वाला दालचंद, चायवाले की कहानी तब सामने आई जब ये कहानी सामने आई कि पुलिसवाले जख्मी रकबर को अस्पताल ले जाने की बजाय सड़क पर खड़े होकर चाय पी रहे थे. तब भी शायद रकबर जिंदा था और चौथा सबूत खुद पुलिस के स्पेशल डीजी आर जे रेड्डी दे रहे हैं. उनका कहान है कि 'एरर ऑफ जजमेंट' था, पुलिसवालों कि उसे अस्पताल लेकर नहीं गए.