मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उद्योगपति विजय माल्या ने भारत के केंद्रीय एजेंसियों और सरकार से देश लौटने की इच्छा जताई है. लोन डिफॉल्ट और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की वजह से माल्या को भारत आने पर वित्तीय अपराधों से जुड़े मुकदमों का सामना करना पड़ेगा. एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) के सूत्रों के हवाले से ये खबर आई है.

अधिकारियों ने संकेत दिया है कि माल्या की संपत्ति को नए कानून के तहत जब्त करने के सरकार के फैसले के बाद माल्या के रुख में ये बदलाव आया है. माल्या ने 2016 में भारत छोड़ दिया था. उन पर बैंकों का करीब 9000 करोड़ रुपये का कर्ज है. वहीं, ईडी ने नए कानून के तहत माल्या की 12,500 करोड़ की संपत्ति को जब्त किए जाने की मांग की है.

भगोड़े वित्तीय अपराधियों के लिए लाए गए ऑर्डिनेंस के तहत कोर्ट को ये अधिकार मिला है कि वे भगोड़े की संपत्ति जब्त करने का आदेश दे सकते हैं. मुंबई के कोर्ट में नए कानून का सामना करने वाले माल्या पहले व्यक्ति हैं. पिछले महीने ईडी ने मुंबई के कोर्ट से मांग की थी कि माल्या को नए कानून के तहत भगोड़ा घोषित कर दिया जाए.

हालांकि, भारत लौटने की इच्छा जाहिर करने की खबरों पर खुद माल्या ने कोई टिप्पणी अब तक नहीं की है. इससे पहले 62 साल के माल्या ने लंदन से भारत प्रत्यर्पण किए जाने की कोशिशों का विरोध किया था. लंदन की एक अदालत में माल्या के भारत प्रत्यर्पण किए जाने का केस भी चल रहा है.

वहीं, पिछले महीने कर्नाटक हाईकोर्ट में चल रहे मुकदमे के दौरान माल्या की ओर से सभी कर्ज चुकाने की बात कही गई थी. बाद में उन्होंने रायटर्स से कहा था कि कोर्ट के सामने 13,700 करोड़ की संपत्ति का ब्योरा दिया गया जिससे कर्ज चुकाया जा सकता है.