मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन की आग अब पुणे पहुंच चुकी है. प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को पुणे में 6 बसें फूंक दीं. पुणे में मराठा क्रांति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया और सड़कों को जाम कर दिया. पुणे-नासिक राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रदर्शनकारियों ने हंगामा किया.

पुणे नासिक हाइवे पर मराठा क्रांति के कार्यकर्ताओं के हंगामे की वजह से यातायात व्यवस्था मामूली रूप से प्रभावित हुई. हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस बल की निष्क्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन वह प्रदर्शकारियों को बसों को आग के हवाले करने से नहीं रोक पाई.

#Maharashtra: Visuals from Pune (Rural) where protests over #MarathaReservation have turned violent, with protestors restoring to burning of tires, vandalising buses and blocking roads. pic.twitter.com/tJA35KDWdP

— ANI (@ANI) July 30, 2018

वहीं महाराष्ट्र कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की बैठक के बाद राज्यपाल विद्यासागर राव को ज्ञापन सौंपा और कहा कि वह मराठा आरक्षण मामले में हस्तक्षेप करें. कांग्रेस ने मराठा समुदाय को 16 फीसदी आरक्षण देने की मांग की.

Maharashtra: After conducting a meeting of their MLAs & senior party leaders, Congress has written to Governor Vidyasagar Rao to intervene in the matter of #MarathaReservation and ask the state government to expedite its efforts for providing 16% reservation to Maratha community pic.twitter.com/GtVsfbZkY7

— ANI (@ANI) July 30, 2018

बता दें कि मराठा आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा के लिए महाराष्ट के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. इसमें सभी दलों के नेताओं ने मराठा आरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की. इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को लेकर भी चर्चा की गई.

सर्वदलीय बैठक करने के बाद महाराष्ट के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अपील की कि स्थिति शांतिपूर्ण होनी चाहिए और कोई भी सख्त कदम नहीं लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट जमा करने के लिए पिछड़ा आयोग से अनुरोध किया गया है और फिर हम विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएंगे. उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण पर सभी दलों का एक ही विचार है और हमने इस मामले पर सर्वसम्मति से खड़े होने का फैसला किया है.

महाराष्ट्र के सीएम ने कहा कि मैंने डीजीपी को निर्देश दिया है कि लोगों के खिलाफ दर्ज मामले, विरोध-प्रदर्शन में भाग लेना, वापस लेना चाहिए. केवल पुलिसकर्मियों पर हमला करने जैसे गंभीर मामले, आग लगने आदि में शामिल होना वापस नहीं लिया जाएगा.