श्रीनगर: प्रसिद्ध डल झील अपने मूल आकार से घटकर आधे से भी कम बस 40 फीसदी रह गई है. अधिकारियों ने बताया कि जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा ने इस जलस्रोत की समस्याओं का समाधान करने के लिए नौसेना और अन्य विशेषज्ञों को आमंत्रित किया है. एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि राज्यपाल ने नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा से पिछले महीने उनकी जम्मू कश्मीर यात्रा के दौरान बातचीत की थी और उनसे उन विशेषज्ञों का नाम सुझाने का आग्रह किया था जो डल झील का और बाद में वुलर झील का भी मानक सर्वेक्षण कर सकें. प्रवक्ता के अनुसार वोहरा ने अपने सलाहकार बी बी व्यास को ड्रेजिंग कोर्पोरेशन ऑफ इंडिया (डीसीआई) के प्रबंध निदेशक राजेश त्रिपाठी से संपर्क करने को भी कहा है.

डल झील की समस्याओं से निबटने को हुई बैठक
प्रवक्ता के मुताबिक नौसेना प्रमुख ने कहा था कि पूर्व जलसर्वेक्षक वाइस एडमिरल एस के झा (सेवानिवृत) जम्मू कश्मीर सरकार को डल झील की समस्याओं से निबटने की योजना तैयार करने में मदद कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सरकार के अनुरोध पर वाइस एडमिरल झा (सेवानिवृत) और त्रिपाठी 30-31 जुलाई को श्रीनगर आए और उन्होंने समस्याओं की पहचान के लिए अलग सर्वेक्षण और आकलन किया.’’ उन्होंने बताया कि राज्यपाल ने गुरुवार को राजभवन में एक बैठक की जहां झा और त्रिपाठी ने अपना आकलन पेश किया.

तय किए जाएंगे समाधान
उन्होंने कहा कि डीसीआई के प्रबंध निदेशक के आकलन के अनुसार डल झील का क्षेत्र 22 वर्ग किलोमीटर से घटकर करीब 10 वर्ग किलोमीटर रह गया है. उसके पानी की गुणवत्ता भी अशोधित सीवर और कचरे, अतिक्रमण आदि की वजह से घट गयी है. उसकी गहराई भी कम हो गयी है. प्रवक्ता के अनुसार चर्चा के बाद तय किया गया है कि नौसेना प्रमुख से डल झील के बाथीमीट्रिक सर्वेक्षण के वास्ते मदद मांगी जाए ताकि यह तय किया जा सके कि इसका तलछट किस सीमा तक हटाया जाए.