नई दिल्ली: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने शुक्रवार को दिल्ली मेट्रो के यात्रियों के लिए नया इलेक्ट्रॉनिक निगरानी नियंत्रण कक्ष और सुरक्षा हेल्पलाइन नम्बर-155655 शुरू किया. नए हेल्पलाइन नम्बर को स्मार्ट निगरानी प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिसे नए कमांड सेंटर में स्थापित किया गया है, जिसका नाम परिचालन नियंत्रण केंद्र-1 (ओसीसी-1) है.

सीआईएसएफ के महानिदेशक राजेश रंजन ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शुक्रवार को यहां इन सुविधाओं का उद्घाटन किया.सीआईएसएफ के प्रवक्ता सहायक महानिरीक्षक हेमेंद्र सिंह ने बताया, ‘अब नया हेल्पलाइन नम्बर 155655 होगा. पुराना हेल्पलाइन नम्बर 22185555 को कुछ दिनों में बंद कर दिया जाएगा.’

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिल्ली मेट्रो और उसके 200 से अधिक स्टेशनों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले सीआईएसएफ ने पहले ही एक कमान सेंटर स्थापित किया हुआ है, जो सेंट्रल दिल्ली से काम करता है. डीजी रंजन ने आज एक नये प्रशिक्षण केंद्र ‘कवच’ का भी उद्घाटन किया.

मेट्रो सेवा के यात्री और राजस्व में बढ़ोतरी : सरकार
इससे पहेल गुरुवार (2 अगस्त) को सरकार ने बताया कि यात्रियों की संख्या और राजस्व के मामले में दिल्ली मेट्रो अन्य शहरों से आगे है. आवास एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि दिल्ली मेट्रो में हर साल लगभग 26 लाख यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं. इसके बाद बेंगलुरु मेट्रो में औसतन 3.57 लाख लोग प्रतिदिन यात्रा करते हैं. चेन्नई मेट्रो में प्रतिदिन औसत यात्री की संख्या 44430, कोच्चि मेट्रो में 35644 और लखनऊ मेट्रो में 9562 है.

पुरी ने बताया कि केन्द्र और राज्य सरकार की बराबर हिस्सेदारी से संचालित हो रही मेट्रो परियोजनाओं से राजस्व में इजाफा हो रहा है. इस मामले में दिल्ली मेट्रो का राजस्व साल 2014-15 में 1505.84 करोड़ रुपये से साल 2015-16 में 1649.19 करोड़ रुपये, 2016-17 में 1765.38 करोड़ रुपये और 2017.18 में 2612.80 करोड़ रुपये हो गया है. इस मामले में बेंगलुरु मेट्रो का 2014-15 में राजस्व 17.83 करोड़ रुपये, 2015-16 में 28.29 करोड़ रुपये, 2016-17 में 110.09 करोड़ रुपये और 2017-18 में 280.98 करोड़ रुपये हो गया है.

उन्होंने बताया कि कोच्चि और लखनऊ मेट्रो का संचालन एक वर्ष से हो रहा है, इसलिये इनके वार्षिक राजस्व के आंकड़े अभी नहीं मिल पाये हैं. पुरी ने स्पष्ट किया कि दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, कोच्चि, लखनऊ, अहमदाबाद, नागपुर, पुणे, मुंबई (लाइन तीन) और नोएडा में मेट्रो में केन्द्र और राज्य सरकार की बराबर हिस्सेदारी है. हैदराबाद और मुंबई (लाइन एक) मेट्रो परियोजना में केन्द्र सरकार की भागीदारी क्रमश: 11.5 और 20 प्रतिशत है. कोलकाता मेट्रो में शत प्रतिशत हिस्सेदारी केन्द्र सरकार की है. जबकि जयपुर मेट्रो शत प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित है.