आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक हब के रूप में पहचान मिलने जा रही है. दरअसल हाल में संपन्न यूपी इंवेस्टर समिट-2018 के जरिए उत्तर प्रदेश को मिले 60000 करोड़ के निवेश में से 41450 करोड़ का निवेश आईटी सेक्टर में आया है.

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में आईटी सेक्टर में यह अब तक का सबसे बड़ा निवेश है. यूपी के उप-मुख्यमंत्री और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक प्रौधोगिकी मंत्री डॉ दिनेश शर्मा के मुताबिक आने वाले तीन वर्षों में प्रदेश के 1.5 लाख युवाओं को इस निवेश के जरिए नौकरी मिलने की संभावना है.

यूपी के आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश करने वाली कंपनियां रिलायंस जिओ और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर दस हजार करोड़ रुपये की लागत वाली अपनी-अपनी योजनाओं का शुभारंभ करेंगी. इनके अलावा तीन कंपनियां टेग्ना इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, इंफोसिस लिमिटेड और बीएसएनएल पांच-पांच हजार करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही हैं.

वहीं वन नाइन सेवन कम्युनिकेशन लिमिटेड 3500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी और टीसीएस भी 2300 करोड़ रुपये निवेश करेगी.

हालांकि अधिकतम निवेश नोएडा, ग्रेटर नोएडा मे होने की उम्मीद है. लेकिन कंपनियों ने लखनऊ में बनी आईटी सिटी और और अन्य शहरों में भी दिलचस्पी दिखाई है. पिछले 3 सालों में देश में 106 कंपनियों ने निवेश किया है जिसमें 47 उत्तर प्रदेश में हैं. बताया जा रहा है कि कई शहरों में आईटी हब बनाए जाएंगे. फिलहाल लखनऊ, मेरठ, आगरा में इनका काम शुरू है. जबकि वाराणसी, कानपुर व गोरखपुर में भी आईटी पार्क बनाने की सहमति दी जा चुकी है.

बता दे कि राजधानी लखनऊ में 29 जुलाई को हुए यूपी इंवेस्टर समिट-2018 के ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 60 हजार करोड़ के 81 प्रोजेक्ट का बटन दबाकर शिलान्यास किया था. इस अवसर पर कई बड़े उद्योगपतियों ने यूपी में निवेश को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई थी.