भोपाल : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य से विकासशील और फिर विकसित राज्य बनाने के बाद अब समृद्ध राज्य बनाएंगे। उन्होंने मंत्रालय में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समृद्ध मध्यप्रदेश का विजन साझा किया।

चौहान ने विकास के सभी प्रमुख क्षेत्रों में समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि बिजली, पानी, सड़क और अधोसंरचना निर्माण जैसे बुनियादी क्षेत्रों का रोडमेप पहले ही तैयार है और इन क्षेत्रों में अच्छी प्रगति हुई है। कृषि क्षेत्र में अब उत्पादन की चुनौती लगभग खत्म हो गई है। अब उत्पादन की गुणवत्ता, खाद्य प्र-संस्करण, निर्यात और दोगुना आय बढ़ाने जैसे विषयों पर ध्यान देना होगा। अब दूसरे देशों को भी कृषि उपज निर्यात करने पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि किसानों को ज्यादा फायदा हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगार सृजन एक बड़ा और चुनौतीपूर्ण काम है। जितनी संख्या में युवा शिक्षित हो रहे हैं, उसी अनुपात में ज्यादा से ज्यादा संख्या में उन्हें रोजगार के अवसर मिलना चाहिए। रोजगार अवसरों के सृजन के लिए रचनात्मक तरीके से सोचना होगा। संबल योजना के संबंध में अपना विजन बताते करते हुए चौहान ने कहा कि संसाधनों पर गरीबों का अधिकार है और उन्हें मिलना चाहिये। यह सबकी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा देकर गरीबी पर नियंत्रण किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि अब तक मध्यप्रदेश के निर्माण में जो हुआ है वह अभूतपूर्व है और इसके अच्छे परिणाम सामने हैं। अब एक कदम आगे बढ़ाते हुए समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने का सपना साकार करना है।
उन्होंने कहा कि अधिकारी अपनी प्रतिभा और अनुभव का उपयोग करते हुए समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने का रोडमैप बनाये। सिर्फ अपने विभाग की योजनाओं तक सीमित न रहें। एक सम्पूर्ण सोच प्रस्तुत करें। उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय बजट पर निर्भर रहकर काम करने की पारंपरिक सोच को छोड़कर रचनात्मक प्रयासों से आय के अतिरिक्त स्त्रोत और संसाधन निर्मित कर आगे बढ़ें। बजट से ज्यादा रचनात्मक दृष्टि और प्रतिबद्धता काम करती है। बैठक में वित्त मंत्री जयंत मलैया, मुख्य सचिव बी.पी.सिंह, अपर मुख्य सचिव और सभी विभागों के प्रमुख सचिव उपस्थित थे।