पानी को पीकर ही नहीं, खाकर भी अब आप अपनी प्यास बुझा सकेंगे। वह भी अलग स्वाद के साथ। बेंगलूर के बॉयोटैक्नोलॉजी शोधकर्ता रिचर्ड गोम्स ने प्रकृतिक पदार्थों की मदद से खाने वाले पानी के गोले बनाए हैं। यह पानी का गोला एक पारदर्शी झिल्ली में होगा, जिसे आप गोल गप्पे की तरह खा सकेंगे। यह शोध अभी शुरूआती दौर में है। शोधकर्ता रिचर्ड गोम्स और उनकी टीम ने प्लास्टिक बोतल का विकल्प तैयार करने के मकसद से यह पानी का गोला बनाया है। इस खाने वाले गोले को बनाने वाले रिचर्ड गोम्स बेंगलूर के वर्कबैंच प्रोजैक्ट में जीव विज्ञानी हैं।
 
जैविक रूप से विघटिक हो जाने वाले इस गोले में 50 मिलीलीटर तक पानी होगा। गोम्स और उनकी टीम इस गोले को और बड़ा बनाने की तैयारी कर रही है, जिससे की गोले में 100 मिलीलीटर तक पानी आ सके। इससे व्यावसायिक रूप से इसे बनाने में आसानी होगी। गोम्स ने बताया कि हम यहां एक मशीनीकृत समाधान विकसित करने के लिए इंजीनियरों के साथ काम कर रहे हैं

पिछले साल लंदन की एक स्टार्टअप रॉक्स लैब ने एक ऐसा पदार्थ विकसित किया था, जिसमें बुलबुले का आकार देकर पानी भरा जा सकता है। इस बुलबुले में 250 मिलीलीटर तक पानी होता है। इसे 'ओहो' नाम दिया गया। इस ओहो नामक खाने वाले पानी को मैराथन जैसे कार्यक्रमों में बेचा भी जाता है।

पानी और कैल्शियम लवण के घोल को एक आइस ट्रे में डालकर गोले जैसा जमाया जाता है। इसके बाद इन गोलों को शैवालीय जैल के एक कटोरे में डाल दिया जाता है। इससे बर्फ के गोलों के चारों तरफ एक पारदर्शी परत जम जाती है, जिससे बर्फ के पिघलने के बाद भी पानी पारदर्शी गोले में बना रहता है।

अगर आप इस पानी के गोले को फ्रिज में रखते हैं तो यह गोला एक हफ्ते तक सुरक्षित रहेगा। बिना फ्रिज में रखे यह गोला कम से कम तीन दिनों तर ही सुरक्षुत रहेगा। फिलहाल गोले पर जो आवरण किया है वह बिना स्वाद वाला है। बाद में इसमें फलों के रस, एनर्जी ड्रिंक्स और स्वादयुक्त पानी भी डाला जाएगा। इतना ही नहीं, इसकी मांग होने पर इसके लिए एक मशीन बनाकर इन्हें बांटने की भी योजना है।