कोयबंटूर: तमिलनाडु के कोयबंटूर के एक प्रेस वाले ने एक नई तरह की प्रेस (Iron) का आविष्कार किया है. यह प्रेस चारकोल या बिजली के बजाय एलपीजी गैस से चलता है. वातावरण की शुद्धता के लिहाज से अच्छा माने जाने वाले इस प्रेस की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. लाउंड्री चलाने वाले प्रभू ने बताया, 'पहले हम लोग चारकोल से प्रेस करते थे, जिसमें हमेशा ये खतरा बना रहता था कि अगर गलती से भी चारकोल का टुकड़ा किसी कपड़े पर गिर जाता तो भारी नुकसान उठाना पड़ता था. इसके बाद हमने बिजली वाले प्रेस का इस्तेमाल शुरू किया, लेकिन इलाके में बिजली संकट बड़ी समस्या है, जिसके चलते काफी घाटा होता था. एलपीजी से चलने वाले प्रेस इन दिनों से समस्याओं से मुक्त है.'

प्रभु ने बताया एलपीजी से चलने वाले प्रेस लागत के हिसाब से काफी सस्ते भी हैं. पांच किलो एलपीजी से करीब 800 कपड़ों में प्रेस हो जाते हैं. इससे प्रेस करने में समय भी काफी बचता है. इसी वजह से ऐसे प्रेस का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है.

एलपीजी वाले प्रेस से घर में बच्चों और महिलाओं का धुएं से भी बचाव हो रहा है. शहर में केंद्र सरकार की उज्जवला योजना के तहत मिलने वाले एलपीजी सिलेंडर भी इस रोजगार से जुड़े लोगों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं. कुछ परिवार ऐसे हैं जिन्हें गरीबी के चलते उज्जवला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन मिले हैं, वे एक ही सिलेंडर से खाना बनाने के साथ इसी से प्रेस करके भी अपने परिवार का गुजारा चला रहे हैं.

हालांकि ये भी मालूम होना चाहिए कि घरेलू गैस का किसी भी सूरत में व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. महज अस्पताल, नारी निकेतन, जेल, किशोर सदन में ही इसके लिए छूट प्रदान की गई है.