भोपाल। मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों के लिए इस साल के आखिरी तक चुनाव होना है। इसके साथ ही छत्तीसगढ, राजस्थान और मिजोरम में भी चुनाव होंगे। इसके लिए राजनैतिक पार्टियों के साथ-साथ चुनाव आयोग ने भी तैयारियां पूरी कर ली है।वही आचार संहिता के लिए आयोग में बैठकों का दौर जारी है।खबर है कि त्यौहारों के चलते 4 से 6 अक्टूबर के बीच आचार संहिता लगाई जा सकती है, साथ ही चुनाव 26 से 30 नवंबर के बीच होने की संभावना है, क्योंकि दिवाली (7 नवंबर) और ईद (21 नवंबर) पड़ रही है, ऐसे में त्यौहारों की वजह से कोई वोटर्स प्रभावित ना हो, इसके लिए ये तारीखे अनूकूल बताई जा रही है। अगर ऐसा रहा तो  ज्यादा से ज्यादा लोग मतदान में हिस्सा ले सकें। वही राजनैतिक दलों द्वारा आचार संहिता की तारीख बढ़ाने की बात कही गई है, हालांकि अभी तक इस पर आयोग ने कोई एक्शन नही लिया है।

आचार संहिता लगाने के साथ साथ आयोग ने एमपी में बेहिसाब खर्च होने को लेकर भी आशंका जताई है। आयोग ने साफ कहा है कि यह प्रदेश की आर्थिक नगरी है और यहां पर काफी पैसा है और इसका उपयोग चुनाव के दौरान हो सकता है। आयोग द्वारा संभवत: अक्टूबर प्रथम सप्ताह में चुनावी आचार संहिता लगाई जाएगी और इसके बाद ही प्रशासन चुनाव खर्च पर नजर रख सकेगा। इस साल हुए विविध आयोजनों की बात करें तो इस पर 25 से 30 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। अभी सितंबर भी बचा है और यह त्योहार का सीजन है। इसमें भी कई आयोजन होंगे। आचार संहिता के दौरान भी अक्टूबर में नवरात्रि, दशहरा के कई आयोजन ऐसे हैं, जो पारंपरिक रूप से किसी न किसी राजनेता के नाम से प्रसिद्ध हैं। वे भले ही इससे दूर रहें, लेकिन इसमें खर्च में कोई कमी नहीं आने वाली है।

बता दे कि पिछले विधानसभा चुनाव में आयोग ने 4 अक्टूबर 2013 को चुनावी कार्यक्रम जारी किया था। अधिसूचना एक नवंबर और वोटिंग 25 नवंबर 2013 को हुई थी। सूत्रों का कहना है कि इन्हीं तिथियों के आसपास इस बार भी आचार संहिता लगने की संभावना है। वोटिंग भी 26 से 30 नवंबर के बीच हो सकती है।  अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन भरने का काम शुरू हो जाएगा।