भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार दलित विचारकों के मुद्दे पर शुक्रवार को महाराष्ट्र के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पुलिस जांच के बारे में मीडिया को बताया.

एडीजी परमबीर सिंह ने पत्रकारों को बताया कि यल्गार परिषद की रैली में शामिल 4 हजार लोगों के खिलाफ पुणे पुणिस जांच कर रही है. सिंह ने कहा कि रैली में शामिल सिर्फ उन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है जिन्होंने भड़काऊ भाषण दिए.

एडीजी सिंह के मुताबिक, तेलुगू लेखक वरावरा राव और वकील सुधा भारद्वाज के नक्सली संगठनों से संपर्क हैं और इसे सिद्ध करने के लिए पुलिस के पास पुख्ता सबूत हैं. परमवीर सिंह ने कहा, 'जांच में पता चला है कि माओवादी संगठनों की ओर से एक बड़ी साजिश चल रही थी. गिरफ्तार आरोपी माओवादियों को उनके मंसूबे कामयाब होने में मदद कर रहे थे. एक आतंकी संगठन का भी नाम सामने आ रहा है.'

सिंह ने आगे कहा, 'जब हम नक्सली कनेक्शन को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हो गए, तभी हमने अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई की. माओवादियों के साथ उनके (गिरफ्तार विचारक) गठजोड़ के कई साक्ष्य हैं.' एडीजी परमवीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 31 दिसंबर 2017 को दिए भड़काऊ भाषण मामले में 8 जनवरी को मामले दर्ज किए गए. नफरत फैलाने को लेकर भी केस दर्ज किए गए. लगभग सभी आरोपी कबीर कला मंच से जुड़े हैं.

सिंह के मुताबिक, शिकायत में जिन-जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, वे सभी संदिग्ध हैं. यूएपीए के तहत जांच के लिए पुलिस ने 90 से 180 दिन का वक्त मांगा है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस की ओर से कोई चूक नहीं हुई और इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया जाएगा. कुछ संगठन हैं जो पुलिसिया जांच पर सवाल उठा रहे हैं.