नई दिल्ली : भारतीय पुरूष हॉकी टीम की 18वें एशियाई खेलों के सैमीफाइनल में मिली ‘अप्रत्याशित’ हार के बाद हाकी इंडिया ने कहा कि नवंबर महीने में होने वाला हॉकी विश्व कप मुख्य कोच हरेन्द्र सिंह और सहयोगी सदस्यों को खुद को साबित करने का अंतिम मौका होगा। विश्व रैंकिंग में पांचवें स्थान पर काबिज गत चैम्पियन भारत को स्वर्ण पदक का प्रबल दावेदार माना जा रहा था और टीम ने ग्रुप चरण में सभी मैचों में जीत दर्ज करते हुए रिकार्ड 76 गोल किए थे।

हॉकी इंडिया के एक अधिकारी ने कहा- हमारे पुरूष खिलाड़ी बिगड़ैल हो गए है। वे हमेशा सोशल मीडिया पर व्यस्त रहते है और अनुशासन पर ध्यान नहीं देते है। उन्हें एथलीटों, निशानेबाजों और बैडमिंटन खिलाडिय़ों से सीख लेनी चाहिए। भारतीय टीम के लिए सबसे निराशाजनक बात ये रही कि सैमीफाइनल में आखिरी लम्हों में गोल खा गई जिसके बाद मैच 2-2 से बराबर हो गया और टीम शूटआउट में 6-7 से हार गई। इस हार के साथ ही भारतीय टीम 2020 टोक्यो ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करने से भी चूक गई।

उन्होंने कहा- मेरे पास कुछ कहने के लिए शब्द नहीं है। ये खराब और अप्रत्याशित प्रदर्शन था। यह कहीं से स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने दो साल की मेहनत को बर्बाद कर दिया। कमजोर टीमों के खिलाफ 76 गोल करने के बाद अति आत्मविश्वास टीम को ले डूबी। इस अधिकारी ने कहा- खिलाडिय़ों और टीम प्रबंध ने पूरे देश को शर्मिंदा किया है। विश्व कप में ज्यादा समय नहीं है ऐसे में हम अभी कोई बदलाव नहीं कर सकते लेकिन विश्व कप में टीम के प्रदर्शन पर खिलाडिय़ों और टीम प्रबंध का भविष्य निर्भर करेगा।

उन्होंने कहा- टीम के कोचिंग सदस्य जिम्मेदारी लेने से पीछे नहीं हट सकते। ऊपर से नीचे तक पूरे टीम प्रबंध को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। वह बैठ कर वेतन नहीं ले सकते। मलेशिया के खिलाफ टीम बिना किसी योजना के दिखी। अगर विश्व कप में रिजल्ट न आया तो उन्हें हटाया भी जा सकता है। हॉकी इंडिया के इस अधिकारी ने फाइनल में पहुंचने पर महिला टीम की तारीफ की। उन्होंने कहा- हमारी महिला टीम को देखिये। वे अपने लक्ष्य से कभी नहीं भटके। उनका ध्यान खेल पर है और उन्होंने लगातार सुधार किए है।

भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) भी हाकी टीम के प्रदर्शन से खफा है जिनसे उन्हें स्वर्ण पदक की उम्मीद थी। आईओए के अध्यक्ष नरेन्द्र बत्रा ने कहा- इसे कम से कम आश्चर्यजनक कहा जा सकता है। मैंने पिछले कुछ समय में इतना बुरा प्रदर्शन नहीं देखा है। आपकी विश्व रैंकिंग पांचवीं है और 12वीं रैंकिंग वाली टीम के लिए आपके पास कोई रणनीति ही नहीं थी। बत्रा ने कहा- सरकार ने हाकी टीम का खुल कर समर्थन किया है और पुरूष टीम को सभी जरूरी मदद की है लेकिन जब सबसे ज्यादा जरूरत थी तब टीम प्रदर्शन नहीं कर सकी।