छत्तीसगढ़ में मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत के साथ हुई राजनीतिक दलों की बैठक में बीजेपी ने तीन चरणों में मतदान कराने की मांग की जबकि कांग्रेस समेत अन्य दलों ने सीधे एक ही चरण में चुनाव कराने की मांग रखी.

राजस्थान, मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं और सभी राजनीतिक दल चुनाव तारीखों का ऐलान होने से पहले अपनी-अपनी चुनावी तैयारियों में लग गए हैं.

बीजेपी के लीगल सेल के प्रभारी नरेश गुप्ता ने चुनाव आयोग को मतदान संबंधी मांग का एक ज्ञापन भी सौंपा. उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों और सामान्य इलाकों में मतदान अलग-अलग तिथि में हो. चुनाव कार्य में लगे सुरक्षा बलों और कर्मियों को इतना वक्त मिले कि वे सुगमता से एक-दूसरे इलाके में जा सकें.

उनके मुताबिक नक्सली चुनाव के दौरान उत्पात मचा सकते हैं, इसलिए तीन चरणों में चुनाव होगा तो उन्हें गड़बड़ी फैलाने का मौका नहीं मिलेगा. सुरक्षा बलों की तैनाती मतदान स्थलों से लेकर आस-पास के इलाकों में होगी. इससे नक्सलियों पर भी प्रभावी नियंत्रण रहेगा.

उधर, कांग्रेस निष्पक्ष चुनाव कराए जाने की मांग करते हुए कहा कि घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में भेजे जाने वाले ईवीएम मशीनों के साथ-साथ कांग्रेस का एक पोलिंग एजेंट भी साथ जाए.

कांग्रेस को आशंका है कि हेलीकॉप्टर में ईवीएम से छेड़छाड़ की जा सकती है. कांग्रेस ने चुनाव आयोग से बीजेपी सरकार की कई योजनाओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई. उनके मुताबिक हर योजना में मुख्यमंत्री अपनी तस्वीर लगा रहे हैं. उन्होंने रमन सिंह सरकार की टिफिन योजना पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की.

साथ ही, तमाम राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से कहा कि मतदान की तारीख इस तरह से रखी जाए जिससे वोटिंग से दो-तीन दिन पहले और बाद में कोई त्योहार न पड़े.

दरअसल, राज्य में दशहरा और दीपावली के दौरान बड़ी तादाद में लोग त्योहार मनाने में बिजी हो जाते हैं. ऐसे में वो मतदान में रुचि नहीं लेते. कई लोग तो ऐसे होते हैं जो तीज त्योहार में मौके पर अपने पैतृक घरों या फिर दूसरी जगह चले जाते हैं. ऐसे में वे भी मतदान से वंचित हो जाते हैं.

लिहाजा तमाम राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से त्योहार की तिथि और मतदान की तिथि में कम से कम हफ्ते भर का अंतर रखने की मांग की.