भारतीय महिला हॉकी टीम का एशियाई खेलों में 36 साल बाद स्वर्ण पदक जीतने का सपना अधूरा ही रह गया. उन्हें फाइनल में जापान से 1-2 से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा.

भारतीय हॉकी के लिए यह एक और करारा झटका था, क्योंकि एक दिन पहले ही पुरुष टीम सेमीफाइनल में पेनल्टी शूटआउट के जरिए मलेशिया से हार गई थी.

भारतीय महिला टीम खिताब की प्रबल दावेदार थी, क्योंकि वह विश्व रैंकिंग में जापान से पांच पायदान ऊपर थी. लेकिन जापान की खिलाड़ियों ने भारत को कड़ी टक्कर देते हुए 11वें मिनट में ही बढ़त हासिल कर ली, जब मिनामी शिमिजु ने टीम के पहले पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील किया.

भारत ने हालांकि हार नहीं मानी और बराबरी के लिए पुरजोर प्रयास जारी रखा. इसका फल उन्हें 25वें मिनट में मिला, जब नेहा गोयल ने नवनीत कौर के रिवर्स हिट पास को डिफ्लेक्ट कर गोल दागा. इससे पहले हाफ के बाद दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर पहुंच गईं.

जापान की खिलाड़ियों ने छोर बदलने के बाद फिर से 44वें मिनट में बढ़त हासिल कर ली. कप्तान मातोमी कवामुरा ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल किया.

अंतिम क्वार्टर में भारतीय खिलाड़ियों ने बराबरी हासिल करने के कई जतन किए, लेकिन जापान ने अच्छा बचाव करते हुए मैच जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया.