जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार अब चुनावी राजनीति में खम ठोंकने वाले हैं. कहा जा रहा कि कन्हैया 2019 में बिहार की बेगूसराय लोकसभा सीट से सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे. संसदीय राजनीति और चुनाव लड़ने को लेकर उन्होंने एक निजी चैनल से खास बातचीत की.  

कन्हैया कुमार ने कहा, 'हम अब कैंपस की राजनीति से निकलकर बाहर आ गए हैं. हमने संविधान बचाओ, देश बचाओ यात्रा शुरू की है. यह किसी पार्टी के खिलाफ प्रोपेगैंडा नहीं है. उन्होंने यह भी कहा, 'हमारे लिए राजनीति फुल टाइम है लेकिन वह हमारे लिए रोजी रोजगार का सवाल नहीं है. मैं अपनी रोजी रोजगार के लिए शिक्षक के बतौर काम करना चाहता हूं.'

हालांकि कन्हैया कुमार ने चुनाव लड़ने के सवाल पर गोलमोल जवाब दिया. उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने के सिलसिले में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. पार्टी अगर जिम्मेदारी देती है तो अनुशासित कार्यकर्ता की तरह बात मानूंगा और लोगों की इच्छा का सम्मान करते हुए उनका प्रतिनिधित्व करने की चुनौती स्वीकार करूंगा.

पूर्व छात्र नेता ने कहा कि बेगूसराय से चुनाव लड़ना एक कयास है. अभी इसे लेकर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है. सीपीआई के भीतर कोई बातचीत नहीं हुई है. लोकल कमेटी नाम भेजेगी जिस पर सेंट्रल कमेटी विचार करती है. उन्होंने कहा, 'महागठबंधन के दूसरे जो साथी हैं वह भी इस बात को लेकर औपचारिक बात करेंगे. सांसद बनना मेरी इच्छा नहीं है. मैं यह पहले भी अस्पष्ट कर चुका हूं.'

कन्हैया कुमार ने कहा, 'हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं है. अगर हमें उम्मीदवार बनाया जाता है तो हम रोजगार, किसान और नौजवानों के मुद्दे पर संघर्ष करेंगे.' उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में संसद एक महत्वपूर्ण जगह है. वह महत्वपूर्ण स्थान है. उसकी अपनी भूमिका है. इससे इनकार नहीं कर रहे हैं.'

कन्हैया कुमार ने कहा, 'लोकतंत्र को बचाने की मुहिम चल रही है. जनता चाहती है कि सभी संस्थाएं निष्पक्ष रूप से अपना काम करें. शिक्षण संस्थानों पर जो हमले हैं, हम उसके खिलाफ हैं. पढ़े-लिखे बच्चों के लिए रोजगार का मुद्दा हमारे लिए अहम हैं.' राष्ट्रद्रोह के आरोप पर वह कहते हैं, 'बेगूसराय की धरती राष्ट्रकवि पैदा करती है, राष्ट्रद्रोही नहीं.  बेगूसराय के लोग इस बात से पूरी तरह परिचित हैं.'

उन्होंने कहा, 'हम पर आरोप इसलिए लगाया ताकि देश के बुनियादी सवालों पर चर्चा न हो. उसकी सच्चाई यह है कि ना हमने नारा लगाया, ना मैं वहां मौजूद था, ना मैं उस कार्यक्रम का आयोजक था. सरकार बताए कि जिन्होंने नारे लगाए वह कहां है. उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई. जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, वे जमानत पर हैं, सरकार अभी तक आरोप पत्र तक दाखिल नहीं कर पाई है.'

सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर कन्हैया ने कहा, सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि डिसेंट दर्शन लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल है. प्रेशर कुकर फट जाएगा.आप बोलने वालों को नक्सली नहीं कह सकते हैं.  उन्होंने कहा कि दरअसल सरकार इसलिए ऐसे प्रोपेगैंडा रच रही है ताकि मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके. जिन्हें अर्बन नक्सल कहा जा रहा है, उनके घर से किताबें मिली हैं. बताइए जिनके घर किताबें हैं, वह अपराधी कैसे हो गया? जिनके घर बम मिला उनका नाम खबरों से गायब है.