अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो नई दिल्ली पहुंच गई है. गुरुवार को वह भारत के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. इससे पहले उन्होंने कहा है कि भारत और अमेरिका पहली 2+2 वार्ता में ‘बड़े और रणनीतिक’ मुद्दों पर चर्चा करेंगे. पोम्पियो ने कहा कि दोनों देशों के बीच बैठक रूस के मिसाइल डिफेंस सिस्टम और ईरान से तेल खरीद मामले पर  केंद्रित नहीं है.

पोम्पियो और अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ गुरुवार को होने वाली बैठक में हिस्सा लेंगे. दोनों देशों के बीच यह पहली 2+2 वार्ता वार्ता है. बुधवार शाम को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज एयरपोर्ट पर पोम्पियो की अगवानी करने पहुंचीं.

#WATCH: United States Secretary of State, Mike Pompeo, arrives in India for 2+2 dialogue; received by External Affairs Minister Sushma Swaraj in Delhi pic.twitter.com/OQMGR2W4cT

— ANI (@ANI) September 5, 2018

पोम्पियो ने अपने साथ पाकिस्तान और उसके बाद भारत की यात्रा पर आ रहे पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा, 'ये (भारत का रूस से मिसाइल डिफेंस सिस्टम और ईरान से तेल खरीदना) वार्ता का हिस्सा होगा. यह संबंधों का हिस्सा है. ये सारी बातें वार्ता के दौरान जरूर आएंगी लेकिन मुझे नहीं लगता कि बातचीत इन मुद्दों पर केंद्रित रहेगी.'

ऐसी संभावना है कि भारत वार्ता के दौरान अमेरिका को बताएगा कि वह ‘एस-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम’ खरीदने के लिए रूस के साथ करीब 4.5 अरब अरब डॉलर का सौदा करने वाला है. पोम्पियो ने कहा, 'आधे दर्जन से अधिक ऐसी चीजें हैं जिस पर इस वार्ता में हम आगे बढ़ना चाहते हैं. ये फैसले अहम हैं. ये फैसले संबंधों के लिहाज से जरूर अहम हैं लेकिन हम रणनीतिक बातचीत के दौरान उन मुद्दों को सुलझाते हुए खुद को नहीं देखते हैं और इस दौरान इन्हें सुलझाने का इरादा भी नहीं है.'

उन्होंने कहा, 'ये ऐसी चीजें हैं जो बड़ी और रणनीतिक रूप से खास हैं और अगले 20, 40 और 50 साल तक रहेंगी. ये ऐसे मु्द्दे हैं जिन पर मैं और मैटिस बात करेंगे.’

पिछले महीने, पेंटागन ने रूस से हथियारों की खरीद पर अमेरिका के प्रतिबंधों से भारत को छूट देने से इनकार किया था और कहा था कि वाशिंगटन रूसी मिसाइल डिफेंस सिस्टम सौदे को लेकर फिक्रमंद है. पोम्पियो ने पहले 2+2 वार्ता के दो बार रुकने पर भी खेद जताते हुए कहा, 'मैं खेद जताता हूं, दूसरी बार मेरी गलती थी. मुझे प्योंगयांग जाना था लेकिन रक्षा मंत्री मैटिस और मैं अब इस पर आगे बढ़ने को लेकर तैयार हैं.'

भारत और रूस सैन्य संबंधों के मामले में मजबूत साझेदारी रखते हैं. रूस प्रतिस्पर्धा को बनाए रखते हुए अभी भी भारतीय बाजार में हथियारों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. दोनों देशों की सरकार ने S-400 Triumf एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम की खरीदारी के लिए इंटर-गवर्नमेंटल अग्रीमेंट भी साइन किया है जिसकी लागत करीब 4.5 बिलियन डॉलर अनुमानित है. मॉस्को और नई दिल्ली ने कामोव का 226T हल्के यूटिलिटी हेलिकॉप्टर के आयात पर भी सहमति जताई है. यही नहीं, पिछले साल भारतीय रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने दो-दो बार रूस का दौरा किया.

पुतिन और मोदी की निजी दोस्ती के अलावा व्यापार में बढ़ोत्तरी और रक्षा समझौतों ने रणनीतिक द्विपक्षीय साझेदारी की गवाही देते हैं लेकिन अंतराष्ट्रीय परिदृश्य में चीन के उभार, रूस के खिलाफ अंतराष्ट्रीय सैंक्शन और रूस के सामने आर्थिक चुनौतियों की वजह से भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले सालों में भारत-रूस के रिश्तों में बड़े बदलाव आने वाले हैं. इसका असर भारत का अमेरिका के साथ संबंधों पर भी देखा जा सकता है. पोम्पियोऔर मैटिस के साथ वार्ता में संभव है कि रूस को केंद्र में रखते हुए दोनों देशों के बीच वार्ता हो.

भारत भारतीय कामगारों को अमेरिका की ओर से मिलने वाले एच-1बी वीजा की संख्या में कटौती के खतरे को देखते हुए चिंता जताता रहा है. हालांकि हाल के वर्षों में एच-1बी वीजा की संख्या बढ़ी है, फिर भी 2+2 वार्ता के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठ सकता है.

जुलाई में राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान स्वराज ने एच-1बी वीजा की संख्या में कटौती पर विपक्ष की चिंता से इत्तेफाक जताते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि यह सिर्फ सरकार और विपक्ष की नहीं, समूचे सदन की चिंता है. कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने राज्यसभा में पूछे गए सवाल के उत्तर में विदेश मंत्री ने कहा ‘हम इस मामले में वाइट हाउस और अमेरिकी संसद से बात कर रहे हैं. इतना ही नहीं 6 सितंबर को अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ होने वाली मंत्री स्तरीय वार्ता ‘2+2’ में भी इस मुद्दे को उठाएंगे.’

विदेश मंत्री स्वराज ने कहा कि हालांकि पिछले चार साल में एच-1बी वीजा की संख्या में इजाफा हुआ है लेकिन फिर भी इसकी संख्या में कटौती का खतरा बना हुआ है. उन्होंने बताया कि साल 2014 में 1,08,817 एच-1बी वीजा जारी हुए थे, अब यह संख्या बढ़कर 1.29 लाख हो गई है.