राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वरा दो वयस्कों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर निकाले जाने का समर्थन किया है, लेकिन साथ में यह भी कहा है कि इस तरह के संबंध अप्राकृतिक हैं और भारतीय समाज ऐसे संबंधों को मान्यता नहीं देता.

समलैंगिकता पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की तरह संघ भी समलैंगिकता को अपराध नहीं मानता. लोकिन समलैंगिक विवाह और संबंध प्रकृति से सुसंगत एवं नैसर्गिक नहीं है, इसलिए हम इस प्रकार के संबंधों का समर्थन नहीं करते.

अरुण कुमार ने कहा कि परंपरा से भारत का समाज भी इस प्रकार के संबंधों को मान्यता नहीं देता. उन्होंने कहा मनुष्य सामान्यतः अनुभवों से सीखता है इसलिए इस विषय को सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक स्तर पर ही संभालने की आवश्यकता है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला देते हुए भारत में दो वयस्क लोगों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंध को अपराध मानने से खारिज कर दिया.  मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली शीर्ष अदालत की संवैधानिक पीठ ने आईपीसी की धारा 377 को मनमाना करार देते हुए व्यक्तिगत चुनाव को सम्मान देने की बात कही है.

प्रधान न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस खानविलकर ने कहा कि व्यक्तिगत पसंद को इजाजत दी जानी चाहिए. सबको समान अधिकार सुनिश्चित करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि समाज को पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर बादल में इंद्रधनुष खोजना चाहिए. बता दें कि इंद्रधनुषी झंडा एलजीबीटी समुदाय का प्रतीक है. वहीं जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने कहा कि SC का यह फैसला संसद द्वारा पारित मेंटल हेल्थकेयर एक्ट पर आधारित है. इस अधिनियम में संसद ने कहा कि समलैंगिकता मानसिक विकार नहीं है.