नई दिल्ली: इंग्लैंड के खिलाफ 5 टेस्ट मैचों की सीरीज में भारत को सबसे पहले टेस्ट एजबेस्टन में 31 रनों से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद लॉर्ड्स में टीम इंडिया को पारी और 159 रनों से शर्मनाक हार मिली. भारत ने वापसी करते हुए नॉटिंघम टेस्ट में भारत को 203 रनों की करारी शिकस्त दी. तीसरे टेस्ट मैच की इस जीत के बाद लगने लगा था कि भारत वापसी करेगा, लेकिन साउथमप्टन में उसे फिर से 60 रनों से हार का सामना करना पड़ा. चौथे टेस्ट की हार के साथ ही भारत इस सीरीज को भी हार गया. अब भारत और इंग्लैंड के बीच 5वां टेस्ट मैच 7 सितंबर से ओवल में खेला जाएगा.

लॉर्ड्स टेस्ट और साउथमप्टन टेस्ट के गलत फैसलों के बाद अब कप्तान विराट कोहली को ओवल टेस्ट जीतने के लिए कुछ बड़े और कड़े कदम उठाने होंगे. अगर सीरीज का एक और मैच भारत जीतना चाहता है तो यह जरूरी है कि टीम इंडिया पांचवें और अंतिम टेस्ट में कुछ साहसी कदम उठाए. ऐसा इसलिए भी जरूरी है कि विराट कोहली साहसिक फैसलों के लिए ही जाने जाते हैं. आइए देखते हैं कौन से ऐसे कदम हो सकते हैं जो टीम इंडिया को जीत की ओर ले जा सकते हैं:

भारत अब तक इस सीरीज में तीन ओपनिंग जोड़ियों को आजमा चुका है. मुरली विजय-शिखर, मुरली विजय-केएलराहुल और शिखर धवन-केएल राहुल. हालांकि, इनमें से कोई भी जोड़ी कसौटी पर खरी नहीं उतर पाई है. मुरली विजय ने दो टेस्ट मैचों में 26 रन बनाए. केएल राहुल ने 8 पारियों में 113 और शिखर धवनन ने 6 पारियों में 158 रन बनाए. टीम के स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का औसत इन तीनों ओपनरों से ज्यादा अच्छा रहा है. भारत इस टेस्ट मैच में एकदम नई जोड़ी को आजमा सकता. ये जोड़ी पृथ्वी शॉ के साथ बनाई जा सकती है. पृथ्वी शॉ ने हाल ही में इंग्लैंड की धरती पर तीन शतक भी जड़े हैं. पृथ्वी के साथ शिखर धवन को आजमाया जा सकता है. अगर विराट ओपनिंग जोड़ी में एक अलग ही तरह का एक्सपेरिमेंट करना चाहते हैं तो ऋषभ पंत को पृथ्वी के साथ बतौर ओपनर उतार सकते हैं. घरेलू क्रिकेट में भी पंत शीर्ष क्रम पर बल्लेबाजी करते रहे हैं.

इंग्लैंड में निचले क्रम में ऋषभ पंत वैसे भी कुछ खास नहीं कर पा रहे हैं. पृथ्वी शॉफर्स्ट क्लास में शानदार प्रदर्शन की बदौलत टीम में शामिल हुए हैं. उन्होंने 13 फर्स्ट क्लास मैचों में 60.78 की औसत से 1398 रन बनाए हैं. इनमें 7 शतक और 5 अर्द्धशतक शामिल हैं. 20 वर्षीय पंत ऋषभ और 18 वर्षीय पृथ्वी शॉ की जोड़ी अनुभवी बल्लेबाजों के मुकाबले ज्यादा असरदायक हो सकती है.

रविचंद्रन अश्विन की जगह रविंद्र जडेजा का खेलना निश्चित लग रहा है, क्योंकि अश्विन चोटिल हैं. वैसे पूरी सीरीज में अश्विन अब तक अपना प्रभाव नहीं ला पाए हैं. भारत सीरीज पहले ही हार चुका है. अश्विन पूरी सीरीज के दौरान खरे नहीं उतर पाए हैं. लिहाजा पांचवें टेस्ट में रविंद्र जडेजा को ही खेलना चाहिए. हालांकि, विदेशी सरजमीं पर रविंद्र जडेजा का परफॉर्मेंस भी कुछ खास नहीं रहा है. जडेजा ने भारतीय सरजमीं पर 26 टेस्ट में 137 विकेट जरूर लिए हैं, लेकिन इंग्लैंड में जडेजा ने 4 टेस्ट मैचों में सिर्फ 9 विकेट झटके हैं, लेकिन अश्विन की गैरमौजूदगी में जडेजा की अच्छा ऑप्शन हो सकते हैं.

हार्दिक पांड्या ने तीसरे टेस्ट में मैच विनिंग बॉलिंग स्पैल डाला था. उन्होंने 28 रन देकर 5 विकेट लिए थे. साथ ही उन्होंने 52 नाबाद रन भी बनाए थे, लेकिन सिर्फ इस एक परफॉर्मेंस के अलावा इस पूरी सीरीज में हार्दिक पांड्या का प्रदर्शन औसत से भी नीचे रहा है. वह चार टेस्ट खेल चुके हैं और केवल एक में उन्होंने परफॉर्म किया है. वैसे भी पिछले 4 टेस्ट मैचों को देखें तो गेंदबाजों के मुकाबले भारत की बल्लेबाजी काफी कमजोर रही है. ऐसे में बॉलर की जगह एक एक्स्ट्रा बल्लेबाज को खिलाना ज्यादा बेहतर ऑप्शन है. हार्दिक पांड्या के विकल्प के रूप में छठा बल्लेबाज करुण नायर को खिलाया जा सकता है. इंग्लैंड के खिलाफ तिहरा शतक बनाने वाले करुण नायर हालांकि उसके बाद से कुछ खास नहीं कर पाए हैं, लेकिन उन्हें आजमाया जा सकता है.

टीम इंडिया हमेशा से ही अपने स्पिनर्स के भरोसे मैच जीतती रही है. अश्विन अगर चोटिल होते हैं तो कोहली को उनकी जगह रविंद्र जडेजा को खिलाना चाहिए और दूसरे स्पिनर के रूप में कुलदीप यादव को एक और मौका दिया जाना चाहिए. कुलदीप को हार्दिक पांड्या की जगह मौका दिया जाना चाहिए. कुलदीप बल्लेबाजी भी ठीकठाक कर लेते हैं. कम से पांड्या जितने रन तो वह बना ही सकते हैं, लेकिन अगर उनकी गेंदबाजी चल गई तो यह आखिरी टेस्ट मैच भारत की झोली में आ सकता है.

विराट कोहली बेशक स्वयं बेहद अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं, लेकिन कप्तान का मतलब होता है शेष टीम से भी अच्छा परफॉर्म कराना. विराट कोहली की दिक्कत ये है कि वह कोई नया प्रयोग करने में यकीन नहीं रखते. जिस क्रम पर बल्लेबाज आ रहे हैं उसी क्रम पर आते रहते हैं. यदि शुरू में दो विकेट जल्दी गिर जाते हैं तो वह किसी निचले क्रम के किसी बल्लेबाज को भेज सकते हैं. इससे इंग्लैंड की रणनीति प्रभावित होगी. इसके साथ ही वह गेंदबाजी में भी कुछ नए प्रयोग कर सकते हैं, जैसा महेंद्र सिंह धोनी किया करते थे. कई बार नियमित गेंदबाजों की जगह गैर नियमित गेंदबाज परफॉर्म कर जाते हैं. कोहली ऐसा कोई प्रयोग नहीं कर रहे. 5वें टेस्ट में कोहली ऐसा कर सकते हैं और उन्हें ऐसा करना भी चाहिए. क्योंकि सीरीज तो भारत हार ही चुका है, अब उनके पास खोने के लए कुछ नहीं है. अगर नए प्रयोग सफल रहे तो विराट कोहली और बेहतर कप्तान साबित होंगे.