नई दिल्लीः भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के पहले पार्टी के राष्ट्रीय कार्यसमिति की आज यहां बैठक शुरू हो गयी जिसमें लोकसभा एवं कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों की रणनीति, संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा, पार्टी के विस्तार, सरकार की विकास एवं जनकल्याण की योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर विचार किया जाएगा।

डॉ.अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय संस्थान में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने की जबकि संगठन महासचिव रामलाल ने संचालन किया। बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव, संगठन से जुड़े पदाधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश संगठन महामंत्री आदि हिस्सा ले रहे हैं।  शाह ने इस अवसर पर संगठन को मकाबूत बनाने, सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने और उसका प्रचार प्रसार निचले स्तर तक करने तथा चुनाव की तैयारी बूथ स्तर पर करने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 2019 में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलेगा। पिछले चुनाव से भी ज्यादा सीटे जीतेंगे। हमारे पास दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में हो रही इस बैठक में पार्टी अपने शीर्ष नेता के प्रति विशेष प्रस्ताव व श्रद्धांजलि व विभिन्न भाषणों के जरिए उनके प्रति कृतज्ञता जाहिर करेगी। पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि यह भाजपा की पहली बैठक है, जिसमें अटल नहीं होंगे। इसके पहले वे अस्वस्थता के चलते कई बार बैठक में नहीं आ सके, लेकिन पार्टी को उनकी मौजूदगी का अहसास रहता था। अब उनका मार्गदर्शन ही पार्टी का पथ प्रदर्शक बनेगा।

बैठक में सरकार की कल्याण योजनाओं और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है। इसमें किसानों को फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के सरकार के फैसले, नेशनल सिटिजंस रजिस्‍टर, अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के लोगों के अधिकारों की रक्षा को लेकर उठाए गए कदम, ओबीसी राष्ट्रीय आयोग को संवैधानिक दर्जा देने आदि के बारे में भी चर्चा हो सकती है। बैठक में 2019 लोकसभा चुनाव और इस साल होने वाले राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी के बारे में भी चर्चा होगी।

गौरतलब है कि बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में गिरावट, पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि को लेकर विपक्ष हमलावर है।

नोटबंदी और राफेल सौदे को लेकर भी विपक्ष सरकार पर निशाना साध रहा है। इसके अलावा संसद के मॉनसून सत्र के दौरान पारित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक का सवर्ण विरोध कर रहे हैं। गुरुवार को सवर्ण समाज से जुड़े कुछ कथित संगठनों के भारत बंद का आयोजन भी किया था।