पोकरण: राजस्थान का मिनी कुंभ माने जाने वाले जन जन की आस्था के प्रतीक साम्प्रदायिक सद्भाव, कौमी एकता और सामाजिक समरसता और कलयुग में कृष्ण के अवतार माने जाने वाले लोकदेवता बाबा रामदेव के 634वें भादवा मेले का बाबा रामदेव की समाधि पर पन्चामृत स्नान, दुग्धाभिषेक, मंगला आरती, ध्वजारोहण के बाद विधिवत रूप से आगाज हुआ. बाबा रामदेव के जन्मावतरण भादवा सुदी दूज से 634वां भादवा मेला रूणिचा धाम रामदेवरा में बाबा के जयकारों के साथ शुरू हुआ. बाबा रामदेव के मेले के आगाज पर अलसुबह मंगला आरती से पूर्व समाधि पर पंचामृत से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की गई तथा मखमली चादर चढ़ा कर विश्व कल्याण शुख सम्रद्धि की कामना की गई .

पोकरण विधायक शैतानसिंह, शेरगढ़ विधायक बाबूसिंह, जिला कलेक्टर ओम कसेरा, बाबा रामदेव वंशज गादीपति राव भोमसिंह तंवर ने मंगलवार को सुबह तीन बजे ब्रह्ममुहुर्त में बाबा रामदेव की समाधि पर मुख्य पुजारी तंवर समाज के कुलगुरु छंगाणी समाज के पंडितो के सानिध्य में पंचामृत दूध, दही, घी, शहद, केसर, गंगाजल से अभिषेक किया. समाधि की विधि विधान से पूजा-अर्चना कर मखमली चादर तथा 21 किलो की पुष्पों की माला चढाई गई. मंगल आरती के बाद मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण कर भादवा मेले की विधिवत शुरूआत की गई. इस अवसर पर कई जनप्रतिधियो, प्रशासनिक अधिकारियों ने भी बाबा की समाधि पर पूर्ण विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना कर अमन, चैन, खुशहाली, मेले के सफल आयोजन, यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुख, समृद्धि व सलामती के लिए बाबा रामदेव से प्रार्थना की.

लोकदेवता बाबा रामदेव की समाधिस्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों, बाबा रामदेव के वंशजों और पुजारियों की ओर से किए गए अभिषेक, पूजा-अर्चना व मंगला आरती के बाद साढ़े तीन बजे मंदिर के मुख्य द्वार खोले गए. द्वार खुलते ही मंदिर के बाहर कतारों में खड़े हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा तेरी जय बोली. अजमल घर अवतार की जय के जयघोष के साथ मंदिर में प्रवेश किया तथा शांतिपूर्ण दर्शन कर खुशहाली के लिए प्रार्थना की. सुबह साढ़े तीन बजे से दर्शनार्थियों की कतारें शुरू हो गई. मंगलवार को दर्शनार्थियों की करीब पांच कतारें मंदिर के मुख्य द्वार से तीन किमी दूर आरसीपी गोदाम से भी आगे ढाणियों तक पहुंच गई. दूसरी तरफ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पुख्ता प्रबंध किए गए.

सोमवार की देर रात मंदिर के द्वार बंद होने के बाद हजारों श्रद्धालु कतारों में ही सो गए तथा सुबह तीन बजे उठकर मंदिर के बाहर कतारें लगाकर खड़े हो गए. मंगलवार को अलसुबह मंदिर खुलते ही श्रद्धालुओं ने बाबा की समाधि के दर्शन किए. कतार तीन किमी पार गांव में मंगलवार को भादवा माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया के अवसर पर मंदिर परिसर से आरपीसी गोदाम व रेलवे पटरियों तक श्रद्धालुओं की करीब तीन किमी लम्बी कतारें लगी. दर्शनार्थियों का पहला छोर मंदिर के मुख्य द्वार पर था, तो अंतिम छोर तीन से चार किलोमीटर दूर था. हाथों में रंग बिरंगी ध्वजाएं लिए, बाबा के जयकारे लगाते श्रद्धालु आगे बढ़ रहे थे. श्रद्धालुओं का जोश एवं उत्साह देखते ही बन रहा था. धार्मिक रंग में रंगा रुणीचा मंदिर परिसर के चारों ओर श्रद्धालुओं की व्यापक रेलमपेल देखने को मिली. बाबा के जयकारे लगाते श्रद्धालुओं के जत्थे लगातार रामदेवरा पहुंच रहे है.