प्रेस फोटोग्राफर, जिन्हें फोटो जर्नलिस्ट कहना ज्यादा मौजूं होगा। अखबारी दुनिया के वो लोग हैं जो एक फोटो के लिए पूरा शहर नाप देते हैं। कोई हादसा हो तो ये मौजूद, कोई नेता आए या अभिनेता फोटो जर्नलिस्ट वहां पहले से ही तैनात रहते हैं। हर मौसम से जूझते हुए इनकी बाइक्स सड़कों पर सरपट भागती देखी जाती है। लेकिन ये एक कड़ुआ सच है कि इस श्रमजीवी पत्रकार को इसका हक या अहमियत जरा कम ही मिली। गुजिश्ता दो तीन बरसों से फोटो जर्नलिस्ट वेलफेयर समिति सरकार से प्रेस फोटोग्राफरों के लिए सरकारी भूखंड मांग रही थी। इसके लिए ये लोग सीएम साब से लेके कई लोगों से मिले लेकिन सिर्फ वादा ही मिला। जमीन के अलावा ये लोग कैमरों की टूटफूट के लिए एक लाख तक की सरकारी मदद भी चाहते हैं। अब इन्हें पीसीसी चीफ कमलनाथ से कुछ उम्मीद है। समिति के अध्यक्ष पृथ्वीराज, उपाध्यक्ष अशरफ अली, सचिव शमीम खान, राजीव गुप्ता, प्रवीण वाजपेयी, एएन चौकसे और रविंदर सिंह सहित कई फ ोटूगिराफर कमलनाथ से मिले और अपनी मांग रखी। नेताजी ने इनसे वादा किया है कि गर हमारी सरकार बनी तो आपका काम जरूर करेंगे। अब खां ये तो आने वाला वखत ही बताएगा कि सूबे में सरकार किसकी बनती है और लोग अपना वादा याद भी रखते हैं या नहीं।