नई दिल्ली: भारत छोड़कर इंग्लैंड भागे विजय माल्या के प्रत्यर्पण पर लंदन का वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट 10 दिसंबर को फैसला सुनाएगा. किंगफिशर एयरलाइन के 62 वर्षीय प्रमुख पिछले साल अप्रैल में जारी प्रत्यर्पण वारंट के बाद से जमानत पर है. भारत सरकार उसे वापस लाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. माल्या पर भारत में करीब 9000 करोड़ रूपये के धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है.

आपको बता दें कि विजय माल्या के एक बयान को लेकर भारतीय राजनीति में घमासान मचा है. बुधवार को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश होने आए माल्या ने कहा कि उसने भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी और बैंकों के साथ मामले का निपटारा करने की पेशकश की थी.

माल्या ने मंत्री का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘मैं भारत से रवाना हुआ क्योंकि मेरी जिनिवा में एक मुलाकात का कार्यक्रम था. रवाना होने से पहले मैं वित्त मंत्री से मिला था और निपटारे (बैंकों के साथ मुद्दे) की पेशकश की थी.’’ गौरतलब है कि माल्या जब भारत से भागा था, उस वक्त अरूण जेटली वित्त मंत्री थे.

माल्या के इस दावे को अरुण जेटली ने खारिज किया है. जेटली ने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा, "मेरे संज्ञान में यह बात सामने आई है कि विजय माल्या ने सेटलमेंट ऑफर के साथ मुझसे मिलने की बात कही है. बयान पूरी तरह गलत है, क्योंकि यह सच्चाई को सामने नहीं रखता है."

वहीं कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल माल्या के दावे के बाद मोदी सरकार के खिलाफ हमलावर है. कांग्रेस वक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल किया कि माल्या के बारे में सब कुछ पता होने के बावजूद उसे देश के बाहर क्यों जाने दिया गया?

उन्होंने कहा, ‘‘ कांग्रेस बार-बार कहती आ रही है माल्या, नीरव मोदी और कई अन्य लोगों को जानबूझकर बाहर जाने दिया गया. माल्या ने जो कहा है उस पर वित्त मंत्री की तरफ से और स्पष्ट, विस्तृत जवाब आना चाहिए.’’ पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘‘भगोड़ों का साथ, लुटेरों का विकास” भाजपा का एकमात्र लक्ष्य है.