पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट में देशद्रोह का मामला झेल रहे पूर्व राष्ट्रपति जनरल (रिटा.) परवेज मुशर्रफ को चीफ जस्टिस साकिब निसार ने बयान दर्ज कराने के लिए पेश होने का निर्देश दिया है. अपने वकील द्वारा बीमारी का बहाना बनाने पर चीफ जस्टिस ने कहा कि पाकिस्तान में अच्छे डॉक्टर हैं उन्हें स्वदेश लौटने दीजिए.

गौरतलब है कि साल 2016 से दुबई में रह रहे जनरल (रिटा) मुशर्रफ, साल 2007 में संविधान निलंबित करने के मामले में देशद्रोह मामले का सामना कर रहे हैं. पूर्व राष्ट्रपति मार्च 2016 में इलाज के लिए दुबई चले गए थे और तब से सुरक्षा तथा स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान नहीं लौटे.

साल 2007 में मुशर्रफ द्वारा लागू राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश (एनआरओ) से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही पीठ की अध्यक्षता करते सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने यह व्यंग्यात्मक टिप्पणी की.

बता दें कि एनआरओ ने नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार और आपराधिक मामले निरस्त करते हुए इन लोगों को माफ कर दिया था ताकि वे देश वापस लौटकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकें.

सुनवाई के दौरान, मुशर्रफ के वकील अख्तर शाह ने पूर्व राष्ट्रपति के देश वापसी के संबंध में जवाब सौंपा और कहा कि वे पीठ से अपने मुवक्किल (परवेज मुशर्रफ) की बीमारी गोपनीय रखने का आग्रह करते है. इसपर चीफ जस्टिस निसार ने कहा कि इस देश में ऐसे लोग मौजूद हैं जो इस बीमारी से ग्रस्त हैं.

मुशर्रफ के वकील ने पीठ से आग्रह किया कि अगर उनका स्वदेश लौटना जरूरी है तो उन्हें डॉक्टर को दिखाने की अनुमति मिलनी चाहिए और उनका नाम निकास नियंत्रण सूची में नहीं होना चाहिए.  इस पर, चीफ जस्टिस साकिब निसार ने आश्वासन दिया कि मुशर्रफ को पाकिस्तान लौटने दीजिए, कोई उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगा लेकिन मैं इस सूची से उनका नाम हटाने के बारे में कुछ नहीं कह सकता.

अपको बता दें कि कुछ दिनों पहले पाकिस्तानी अखबार डॉन की एक खबर के मुताबिक मुशर्रफ के करीबी डॉ मोहम्मद अमजद के हवाले से बताया गया था कि पूर्व राष्ट्रपति अनजान बीमारी से पीड़ित हैं, जिसकी वजह से वे तेजी से कमजोर पड़ रहे हैं. बीमारी के चलते ही वे देशद्रोह मामले का सामना करने के लिए पाकिस्तान नहीं लौट सकते.