नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने बुलेट ट्रेन से पहले सेमी हाई-स्पीड ट्रेन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है. इसी क्रम में हाल ही में नेक्सट जेनरेशन ट्रेन-18 (T-18) का ट्रायल शुरू किया गया था. बिना इंजन के दौड़ने वाली इस ट्रेन को चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) में तैयार किया गया है. ट्रायल पूरे होने के बाद ट्रेन को यात्रियों के लिए 15 दिसंबर से चलाया जा सकता है. T-18 शाताब्दी ट्रेन की जगह लेगी. भारतीय रेलवे एक और इंजनलेस ट्रेन T-20 तैयार कर रहा है जिसे 'मिनी बुलेट ट्रेन' कहा जा सकता है. ये ट्रेन अपनी खूबियों के चलते राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों की जगह लेगी.

T-18 की तरह T-20 भी 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेगी. रिपोर्टस के मुताबिक मौजूदा समय में दिल्ली से हावड़ा जाने वाली राजधानी ट्रेन जितना समय लेती है T-20 उसके मुकाबले 3 घंटे 35 मिनट कम समय लेगी. T-20 के 2020 में शुरू होने की संभावना जताई जा रही है. ट्रेन में 20 कोच होंगे. ट्रॉयल के दौरान इसे 176 किमीं. प्रति घंटे की रफ्तार चलाया जाएगा. ये ट्रेन मेट्रो ट्रेन की तरह होगी. ट्रेन के दोनों छोर पर ड्राइवर केबिन होगी जिससे इंजन को रिवर्स करने में समय की बर्बादी को रोका जा सकेगा. इसके अलावा, ऑटोमेटिक डोर, यात्रियों के लिए वाई-फाई हब आदि सुविधाएं होंगी.  

चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्टरी शुरुआत में दो T-20 ट्रेन बनाएगी. बाद में इसी तरह की 24 ट्रेन तैयार की जाएंगी. एक कोच के निर्माण की लागत लगभग 6 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है. रेलवे का मानना है कि इन हाईस्पीड ट्रेनों के जरिये वह मोटी कमाई करेगा.

उधर, 16 कोच वाली मेट्रो जैसी T18 ट्रेन जनवरी में ट्रैक पर दौड़ सकती है. Train 18 की अधिकतम स्पीड 160 किमी/घंटा है. T-18 को चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) ने रिकॉर्ड 18 महीनों में बनाया है. फिलहाल गतिमान एक्सप्रेस ही 160 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ़्तार पर चलती है. T18 ट्रेन में इंजन, कोच का ही हिस्सा है.