गुजरात के द्वारका जिले के छोटे से गांव वरवाला में रहकर एक छोटी सी दुकान चलाने वाले अल्पेश कंसारा ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है और इंटरनेशनल लेवल पर अपना और भारत का नाम उजागर किया है. अल्पेश पिछले 14 साल से बोतल आर्ट के जरिये भारतीय और गुजरात की संस्कृति शिल्पकला की विरासत को बचने के लिए प्रयत्नशील है. अल्पेश ने 40 से ज्यादा कलाकृतिया ने कांच की बोतल में बनाई है जिसे देखकर कोई भी हैरान हुए बिना नहीं रहा जा सकता.

अल्पेश ने कांच की बोतल को तोड़े बिना ही बोतल के मुंह में एक लोखंड की पतली रॉड (सलिया )का उपयोग कर माचिस की तीलियों और कार्डबोर्ड कागज का उपयोग कर बड़ी बड़ी कृतियां बोतल में बनाई हैं जिसमे देश भर के ऐतिहासिक मंदिर और इमारतों के साथ साथ कुछ विदेशी ऐतिहासिक इमारतों की कृतियां भी दिख रही हैं.

 "द बॉटल शिप राइट "नामक अमेरिकन पुस्तक 40 से ज्यादा देशों में पढ़ी जाती है. और इस पुस्तक में  9 बार अल्पेश को जगह मिली है. इतना ही नहीं श्रेष्ठ कला सर्जन के लिए शिप इन बॉटल एसोसिएशन ऑफ़ अमेरिका द्वारा अल्पेश को मान्य सदस्य का पद दिया गया है और सम्मान भी.

शिप इन बॉटल एसोसिएशन ऑफ़ अमेरिका में सदस्यता रखने वाले यूरोपियन आर्टिस्टों में मात्र दो भारतीय हैं, जिनमें से एक गुजरात के अल्पेश हैं. इण्डिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड ,एशिया बुक ,यूनिक बुक सहित 6 रिकॉर्ड अल्पेश ने बोतल आर्ट द्वारा स्थापित किये है.

भारतीय स्थापत्य कला द्वारा पूरे विश्व के लोगों को इस कला की जानकारी मिले इसके लिए अल्पेश ने बोतल में प्राचीन मंदिर, हवेली और महल जैसी कलाकृतियां बनाई है. एक और जहां आज की युवा पीढ़ी मोबाईल टीवी ,कम्यूटर में ही मस्त रहती है ऐसे में अल्पेश इस कला को युवाओं तक पहुंचाने के लिए कई कार्यक्रमों में इसका प्रदर्शन करते है.      

अब अल्पेश कंसारा का नाम सिर्फ द्वारका या गुजरात में ही नहीं परन्तु पूरे भारत और विश्व में मशहूर है. अल्पेश कंसारा की तारीफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ,अमिताभ बच्चन ,मोरारीबापू जैसे कई बड़े और गणमान्य लोग भी कर चुके है. अल्पेश ने द्वारकाधीश मंदिर 6 महीनों का समय लेकर बोतल में बनाया था. जिसने अब तक 22 से ज्यादा रिकॉर्ड दर्ज किये है.