नई दिल्ली: दीपावली के एक दिन बाद गुरुवार की सुबह दिल्ली में इस साल की हवा की सबसे खराब गुणवत्ता दर्ज की गई और शहर में धुंध छाई रही. इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करते हुए बड़े पैमाने पर हुई आतिशबाजी के कारण राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण का स्तर ‘अत्यंत गंभीर और आपातकालीन’ (सीवियर प्लस एमरजेंसी) श्रेणी में प्रवेश कर गया जो अनुमति की सीमा से दस गुना अधिक है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

कई लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पटाखे केवल रात आठ बजे से दस बजे तक चलाने के उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन होने पर विवशता जाहिर की और नाराजगी जताई. उधर, डॉक्टरों ने लोगों से घर में ही रहने, एन-99 मास्क का इस्तेमाल करने तथा बाहर नहीं घूमने की सलाह दी.

दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसने 550 से अधिक मामले दर्ज किए और इस संबंध में शीर्ष अदालत के आदेश का उल्लंघन करने पर 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने कहा कि दिवाली वाले दिन उसने 2776 किलोग्राम पटाखे भी जब्त किये और पटाखों की अवैध बिक्री के संबंध में 87 लोगों को गिरफ्तार किया और 72 मामले दर्ज किए.

दमकल विभाग ने 300 से अधिक कॉलपर सेवाएं दीं
दिल्ली दमकल विभाग ने दिल्ली में दिवाली वाली रात पटाखों, एलपीजी सिलेंडर विस्फोट और अन्य के कारण हुई आग लगने की घटनाओं की 300 से अधिक कॉल पर सेवाएं दीं. इसी में से एक घटना में दो बच्चों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए. विभाग ने कहा कि कॉलों की संख्या पिछली सालों की तुलना में ज्यादा है.

इस दिवाली राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न अस्पतालों में जलने से घायल होने के 250 से अधिक मामले दर्ज हुए. सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली एवं अन्य त्योहारों के दिन सिर्फ रात आठ बजे से रात 10 बजे तक आतिशबाजी की अनुमति दी है. न्यायालय ने सिर्फ ‘‘हरित पटाखों’’ के निर्माण और बिक्री की इजाजत दी है, क्योंकि इसमें कम रोशनी, कम आवाज और कम नुकसानदेह रसायन निकलते हैं. न्यायालय के आदेश के बाद भी कुछ जगहों पर इसका उल्लंघन होते देखा गया. इन जगहों पर तय समयसीमा के पहले और बाद में बड़े पैमाने पर आतिशबाजी हुई.

दिल्ली-एनसीआर में मयूर विहार एक्सटेंशन, लाजपत नगर, लुटियंस दिल्ली, आईपी एक्सटेंशन, द्वारका और नोएडा सेक्टर-78 ऐसे इलाकों में शामिल रहे जहां उच्चतम न्यायालय के आदेश का खुला उल्लंघन हुआ.

पुलिस ने कहा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी
पुलिस ने आदेश का उल्लंघन होने की बात कबूली और कहा है कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि वे उल्लंघनों पर लगाम लगाने के लिए लगातार गश्त कर रहे हैं.

केंद्र द्वारा संचालित सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक, पटाखों से पैदा हुए धुएं सहित अन्य कारणों से दिल्ली में समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 574 तक चला गया जो ‘‘अत्यंत गंभीर और आपातकालीन’’ श्रेणी में आता है. समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक अनुमति दी जाने लायक सीमा से 10 गुना अधिक दर्ज किया गया.

दिवाली के बाद दिल्ली का प्रदूषण स्तर पिछले साल की तुलना में करीब दो गुना रहा. बृहस्पतिवार को एक्यूआई 642 के आंकड़े पर दर्ज किया गया जबकि वर्ष 2017 में (दिवाली के अगले दिन) एक्यूआई 367 पर जबकि 2016 में 425 पर दर्ज किया गया था.

वायु गुणवत्ता के इस श्रेणी में पहुंचने का मतलब यह है कि इस जहरीली हवा में ज्यादा देर तक रहने से स्वस्थ लोगों को भी सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं. यह हवा बीमार व्यक्तियों को तो गंभीर रूप से प्रभावित करेगी.

शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’ माना जाता है, 51 और 100 के बीच इसे ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’ माना जाता है, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘काफी खराब’ और 401 और 500 के बीच इसे ‘अत्यंत गंभीर’ माना जाता है.

'समूची राष्ट्रीय राजधानी में धुएं की मोटी परत चढ़ गई है'
अधिकारियों ने बताया कि बड़े पैमाने पर हुई आतिशबाजी के कारण समूची राष्ट्रीय राजधानी में धुएं की मोटी परत चढ़ गई है और दृश्यता में काफी कमी आ गई है. ‘सफर’ ने चेताया था कि यदि पिछले साल की तुलना में कम नुकसानदेह पटाखे भी जलाए गए तब भी हवा की गुणवत्ता अत्यंत गंभीर श्रेणी में रहेगी.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभी दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक करीब 574 है. बृहस्पतिवार को आधी रात के बाद तड़के दो बजे यह सूचकांक ‘अत्यंत गंभीर’ श्रेणी में प्रवेश कर गया और शाम तक यह इसी श्रेणी में बना रहेगा.  पीएम 2.5 का स्तर तय सीमा से करीब सात गुना ज्यादा 414 दर्ज किया गया जबकि पीएम10 का स्तर तय सीमा से करीब चार गुना ज्यादा 433 दर्ज किया गया.

भारत में आधिकारिक तौर पर पीएम2.5 की तय सीमा 60 माइक्रो ग्राम क्‍यूबिक मीटर (एमजीसीएम) है जबकि पीएम10 की तय सीमा 100 एमसीजीएम है.  पीएम2.5 और पीएम10 हवा में रहने पर इंसान की सेहत को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं, क्योंकि वे श्वसन प्रणाली से प्रवेश कर शरीर में प्रवाहित हो रहे खून तक पहुंच जाते हैं. इस बीच, दिल्ली के निवासियों ने आदेश के बावजूद प्रदूषण बढ़ने पर नाराजगी जताई.

मयूर विहार के वरिष्ठ नागरिक हसमुख राय ने कहा, ‘दिल्ली मुझ जैसे टीबी मरीजों के लिए गैस चैम्बर है. हम विकट स्थिति में फंस गये हैं. यदि हम टीबी से जान बचाते हैं तो हम प्रदूषण से मरेंगे. ’ उन्होंने सवाल किया,‘इस सीजन में जब लोग विभिन्न मुद्दों पर अध्यादेश लाने की बात कर रहे हैं, क्यों नहीं नेता पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए अध्यादेश लाने के विषय पर साथ आते?'

‘केयर फोर एयर’ की सह संस्थापक ज्योति पांडे लावकरे ने कहा,‘न्यायपालिका ने हमारी कार्यपालिका को जरूरी अधिकार दिये हैं. हम नागरिकों की रक्षा के लिए अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से अपनी कार्यपालिका का सहयोग करने तथा लोकतंत्र के तीनों अंगों से मिलकर काम करने का अनुरोध करते है.