पुणेः महाराष्ट्र में मराठा समाज को 16 फिसदी आरक्षण दिए जाने का कानून बनने के बाद अब सवर्ण जातीयों में आरक्षण कि मांग उठने लगी है. महाराष्ट्र का ब्राह्मण समाज भी अब अपने आर्थिक और सामाजिक सर्वेक्षण की मांग कर रहा है. पुणे में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ ने ये मांग की है. मराठा आरक्षण के बाद महाराष्ट्र में धनगर आरक्षण और मुस्लिम आरक्षण की मांग तेज हुई है. अब इस पर राजनीति भी हो रही है. ब्राह्मण समाज भी अब आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग कर कहा है. महाराष्ट्र में 80 सें 90 लाख ब्राह्मण है. इसमे से 70 फिसदी लोग आर्थिक दुर्बल है , ऐसा ब्राह्मण नेताओं का कहना है. 

ब्राह्मण महासंघ के नेता आनंद दवे का कहना है,  'आज भी ब्राह्मण समाज के ज्यादातर लोग बुरे हालात में है. कुछ साल पहले की स्थिति और आज की स्थिति में बदलाव आया है. आज कई लोग बुनियादी जरुरतें पूरी नहीं कर पाते है. कई लोग पूजा पाठ का काम करते हैं, उन्हे साल में चंद दिन ही काम मिलता है. राज्य में लगभग 80 लाख ब्राह्मण है. उनमे से 70 फीसदी लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर है. हम चाहते है राज्य पिछाडा वर्ग आयोग द्वारा हमारा भी सर्वक्षण हो. ब्राह्मणों की स्थिति क्या है, उसका डाटा इकठ्ठा किया जाए. वह रिपोर्ट आने पर आगे क्या करना है उसके बारे में सोचेंगे.' 

महाराष्ट्र में इसले पहले ही आरक्षण 52 फिसदी था. अब 16 फिसदी मराठा आरक्षण देने कें बाद यें 68 फिसदी तक पहुंचा है. दूसरी और अब धनगर समाज भी एसटी में आरक्षण की मांग कर रहा है. लेकिन सरकार कह रही है की हम अलग से आरक्षण देगें. एसटी याने आदिवासी समाज के आरक्षण को कोई धक्का नही पहुचाएंगे.

इसका मतलब स्पष्ट है की महाराष्ट्र में आरक्षण अब 70 फिसदी सें उपर चला जाएगा. क्योंकि अगले विधानमंडल सत्र में फडणवीस सरकार धनगर आरक्षण पर एटीएआर ( एक्शन टेकन रिपोर्ट) लाने जा रही है. ये धनगर समाज को आरक्षण देने की प्रक्रिया का पहला पड़ाव होगा. अब सुप्रीम कोर्ट की बात माने तो 50 फिसदी के ऊपर का आरक्षण मान्य नहीं है.

वहीं मुस्लिम समाज भी 5 फिसदी आरक्षण पर अड़ा है. लेकिन सीएम देवेंद्र फडणवीस कह चुके हैं की धर्म पर आधारित आरक्षण नहीं दिया जा सकता. हमारा आरक्षण जाति पर आधारित है. वैसे कुछ लोगों ने मुस्लिम धर्म अपनाने के बाद भी जाति नहीं छोडी थी. उन्हें ओबीसी में आरक्षण मिला है . ऐसी 52 जातियां सरकार बता रही है. तो अगर अन्य जातियां मुस्लिम समाज में पिछडी हैं और आरक्षण पर विचार करने की बात सरकार कह रही है . 

वहीं MIM ने भी मुस्लिम आरक्षण को लेकर आक्रमक होते हुए कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है. इससें पहले एनसीपी -कांग्रेस की सरकार ने इने 5 फिसदी आरक्षण दिया था. जो बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्थगित किया था. अब मराठा समाज के आरक्षण के बाद मुस्लिम, धनगर समाज के साथ सवर्ण ब्राह्मण समाज भी अपने सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के सर्वेक्षण की मांग कर की है.

इन आरक्षण की बढती मांग नें ओबीसी समाज में चिंता बढी है . महाराष्ट्र में 19 फिसदी आरक्षण ओबीसी को दिया गया है . अगर 50 फिसदी से ऊपर का आरक्षण कोर्ट में गया तो फिर इन्हें अन्य जातियों के कोटे में ना राज्य सरकार लाए, ये ओबीसी चाहते है. मराठा समाज को आर्थिक, शैक्षिक पिछड़ेपन पर मिला आरक्षण से अब ब्राह्मण समाज भी आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग उठा रहा है. अब राज्य सरकार क्या निर्णय लेती है ये देखना होगा.