श्रीनगर : मिसेज इंडिया 2018 इंटरनेशनल का खिताब पहली बार कश्मीर घाटी की नुसरत परवीन के खाते में गया है. नुसरत परवीन अपनी जीत से जितना खुश हैं, उससे कहीं ज्यादा वतन के लोगों की शुक्र गुजार हैं. मिसेज इंडिया 2018 इंटरनेशनल बानी कश्मीर की पहली और देश की पहली मुस्लिम महिला की यह कहानी बेहद दिलचस्प है. दरअसल, परवीन एक लड़के से प्यार करती थी और उसी से शादी कर महाराष्ट्र में जा बसी.

हालात और वक्त को शायद परवीन को यह सब मंजूर नहीं था. वैवाहिक जीवन में सफलता न मिलने के बाद परवीन मनो-मस्तिष्क से टूट गईं. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. पुरानी कहावत है कि जब दर्द हद से ज्यादा होता है तो अक्सर हिम्मत दे जाता है. 38 वर्ष तीन बच्चों की मां नुसरत परवीन के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ. अपने दर्द को अपनी ताकत बना कर इस महिला ने मिसेज इंडिया इंटरनेशनल का ताज अपने सर पर सजा लिया.

नुसरत का कहना है कि उन्हें इस कामयाबी तक पहुंचाने में कश्मीर की आम जनता और उनके परिवार का बहुत बड़ा सहयोग है. उन्होंने कहा कि अगर आम लोगों का प्यार उनको नहीं मिलता तो वह कभी भी इस ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाती.

नुसरत का बचपन कश्मीर के एक छोटे से गांव दक्षिण कश्मीर के यरिपोरा में गुज़रा. 6 साल की उम्र में कश्मीर छोड़ा मगर कश्मीर से रिश्ता नहीं टुटा वह लगतार कश्मीर आती रही. शादी के बाद ससुराल में खड़ी हुई मुशिकलों ने इस महिला के खुशियों का अंत कर दिया था मगर वक्त रहते अपने अतीत को भुला कर इसने आगे बढ़ने का फैसला किया और जिसक शख्स ने इसे इसलिए ठुकरा दिया थे कि यह उसके हैसियत के बराबर नहीं है, उसे यह साबित कर दिया कि एक महिला अगर चाहिए तो अपनी एक पहचान बना सकती है.